Uttarakhand

Petrol-Diesel के रेट से महंगाई बढ़ी: इंदिरा

हल्‍दवानी, खबर संसार। Petrol-Diesel की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी के कारण आम आदमी का जीवनयापन करना मुश्किल होता जा रहा है। प्रदेश में पेट्रोल की कीमत लगभग 90 रू0 एवं डीजल की कीमत लगभग 80 रू0 प्रतिलीटर तक पहुंच गयी है।

फरवरी माह में ही पन्द्रह बार पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel) की दरों में बढ़ोत्तरी की गयी है। पड़ोसी देशों की तुलना में भारत में डीजल एवं पेट्रोल के दाम सर्वाधिक है। सरकार पेट्रोल एवं डीजल की मूल्य वृद्धि रोकने में विफल साबित हुयी है। पेट्रोलियम पदार्थों की आसमान छूती कीमतों के कारण खाद्य सामग्री एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमते भी दिन पर दिन बढ़ती जा रही है।

खाद्य तेल के दाम भी 150 रू0 प्रतिलीटर से अधिक हो चुके है वहीं प्याज के दाम भी 50 रू0 प्रति किलो से अधिक हो गये है। रसोई गैस सिलेण्डर में पूर्व में जारी सब्सिडी को लगभग समाप्त कर दिया गया है। फरवरी 2020 में उपभोक्ताओं को 309.57 रू0 गैस सब्सिडी मिलती थी जो अब 18 रू0 रह गयी है। वर्ष 2021 में 57 दिन के अन्दर रसोई गैस के दाम 150 रू0 प्रति सिलेण्डर बढ़ा दिये गये है, जिस कारण रसोई गैस सिलेण्डर के दाम 814 रू0 प्रति सिलेण्डर से अधिक हो गये है। Petrol-Diesel

2014 रसोई गैस की 414 रूपये थी

वर्ष 2014 में रसोई गैस सिलेण्डर की कीमत 414 रू0 थी, जो बढ़कर लगभग दोगुनी हो गयी है। भारत सरकार की उज्जवला योजना के जनपद में 30 हजार लाभार्थियों में से 15 हजार से अधिक लोगों ने महंगाई के कारण सिलेण्डर भरवाना बन्द कर दिया है जोकि इस योजना की विफलता को दर्शाता है। रोडवेज के किराये में लगातार वृद्धि से गरीब एवं मध्यमवर्गीय लोगों का यात्रा करना मुश्किल होता जा रहा है। सरकार की विफल नीतियों के कारण बढ़ती महंगाई से आम आदमी का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है।

प्रदेश में बेरोजगारी की समस्या दिन पर दिन विकराल रूप लेते जा रही है। लगभग 1 करोड़ की जनसंख्या वाले प्रदेश में 15 लाख से भी अधिक युवा बेरोजगार है तथा रोजगार की तलाश में पलायन करने को मजबूर है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा वर्ष 2017 में जारी घोषणा पत्र में 6 माह के भीतर रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूर्ण करने की घोषणा की थी, परन्तु 4 वर्ष बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुयी है।

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विभिन्न विभागों में रिक्तियां उपलब्ध होने के बाद भी सरकार द्वारा बेरोजगारों को रोजगार देने हेतु कोई प्रयास नहीं किया गया है। उपनल के द्वारा आउटसोर्सिंग के तहत विभिन्न विभागों में कार्यरत लगभग 21 हजार से अधिक युवा अपने भविष्य को सुरक्षित रखने हेतु धरना प्रदर्शन करने को मजबूर है। आगामी बजट सत्र में कांग्रेस पार्टी प्रदेश में बढ़ती महंगाई तथा बेरोजगारी की विकराल समस्याओं पर सरकार की विफलता पर जनता की आवाज बनकर सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं रखेगी और भाजपा सरकार से उनके घोषणा पत्र में किये गये खोखले वादों का हिसाब मांगा जायेगा।

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