देश के दिग्गज उद्योगपति और रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने हाल ही में एक इवेंट में अपने करियर के सबसे कठिन और जोखिम भरे फैसले का ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि किस तरह एक सपने ने उन्हें न केवल बड़ी चुनौती लेने के लिए प्रेरित किया, बल्कि वही कदम बाद में देश की दिशा बदलने वाला साबित हुआ।
जब सबने कहा ‘नहीं’, तब अंबानी ने देखा भविष्य
मुकेश अंबानी ने कहा कि जियो की शुरुआत उनके जीवन का सबसे बड़ा और जोखिम भरा निर्णय था। उस समय अधिकांश विशेषज्ञों और कारोबारियों का मानना था कि भारत में सस्ते इंटरनेट की मांग और व्यवहार्यता दोनों संदिग्ध हैं। लेकिन अंबानी को विश्वास था कि डिजिटल कनेक्टिविटी भारत के विकास में अहम भूमिका निभाएगी।
करोड़ों का निवेश, तीन साल बिना मुनाफे
उन्होंने बताया कि शुरुआत में जियो को लेकर काफी आलोचना हुई। “हमने लाखों करोड़ रुपये का निवेश किया और पहले तीन साल बिना किसी कमाई के आगे बढ़े,” अंबानी ने कहा। लेकिन उनका सपना था कि हर भारतीय को सस्ता, तेज़ और आसान इंटरनेट मिले। आज जियो भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है, जिसने इंटरनेट की परिभाषा ही बदल दी है।
युवा पीढ़ी के लिए संदेश: जोखिम लो, सपना देखो
अंबानी ने युवाओं को भी प्रेरित करते हुए कहा, “अगर आपका उद्देश्य समाज का भला करना है और नीयत साफ है, तो जोखिम लेना गलत नहीं होता। बड़े फैसले कठिन होते हैं, लेकिन उनका फल भी बड़ा होता है।” उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे बड़े सपने देखें और साहस के साथ आगे बढ़ें।
दूरदृष्टि और नेतृत्व की मिसाल
मुकेश अंबानी का यह बयान इस बात का प्रमाण है कि लीडर वही होता है जो भीड़ के खिलाफ चलने का साहस रखता है। जियो सिर्फ एक कंपनी नहीं, बल्कि डिजिटल इंडिया की नींव है, और यह सब संभव हुआ एक व्यक्ति की दूरदृष्टि और जोखिम उठाने की क्षमता से।
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