अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से आश्वासन दिया है कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। ट्रंप ने इस कदम को मास्को को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की दिशा में एक “बड़ा कदम” बताया।
हालांकि भारत सरकार ने ट्रंप के इस दावे पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। ट्रंप ने कहा, “कोई तेल नहीं होगा, वे तेल नहीं खरीद रहे हैं,” लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह बदलाव तुरंत नहीं, बल्कि “थोड़े समय में” लागू होगा।
भारत सरकार की चुप्पी और ट्रंप की नाराज़गी
वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। बताया जा रहा है कि ट्रंप यूक्रेन युद्ध के समाधान में प्रगति न होने से निराश हैं। उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को शांति वार्ता में बाधा बताया।
ट्रंप शुक्रवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मिलने वाले हैं। चीन के बाद भारत रूस से तेल खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है। इसी कारण ट्रंप ने अगस्त में भारत पर तेल आयात शुल्क 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिया था।
भारत की तारीफ और पाकिस्तान से सुलह की उम्मीद
ट्रंप ने भारत की सराहना करते हुए कहा, “भारत महान देश है, जिसका नेतृत्व मेरे बहुत अच्छे मित्र कर रहे हैं।” उन्होंने उम्मीद जताई कि “भारत और पाकिस्तान एक साथ बहुत अच्छी तरह रहेंगे।”
मिस्र के शर्म अल शेख में आयोजित विश्व सम्मेलन में ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की भी प्रशंसा की।
उन्होंने दावा किया कि अब तक वे सात अंतरराष्ट्रीय विवाद सुलझा चुके हैं और अब इजराइल-गाजा विवाद को जोड़कर यह संख्या आठ हो गई है।
ट्रंप के दावे पर भारत का रुख स्पष्ट नहीं
ट्रंप कई बार यह दावा कर चुके हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष को हल करने में भूमिका निभाई है। वहीं भारत का कहना है कि डीजीएमओ स्तर पर बातचीत के बाद ही संघर्ष विराम पर सहमति बनी थी। ट्रंप के इस ताज़ा बयान से भारत-अमेरिका और रूस के बीच संबंधों पर नई राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है।
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