राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने अपने हालिया संबोधन में संगठन, समाज और राष्ट्र से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर राय रखी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि संघ में कोई भी पद जाति, वर्ग या क्षेत्र के आधार पर नहीं दिया जाता, बल्कि जो व्यक्ति कार्य करता है और योग्य साबित होता है, वही जिम्मेदारी संभालता है।
संघ में पद की कसौटी क्या?
भागवत ने कहा कि सरसंघचालक बनने के लिए एससी, एसटी, ब्राह्मण या किसी खास वर्ग से होना जरूरी नहीं है। “जो हिंदू है, काम करता है और सबसे उपयुक्त है, वही जिम्मेदारी संभालेगा।” उन्होंने यह भी बताया कि 75 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद उन्होंने स्वयं निवृत्ति की इच्छा जताई थी, लेकिन कार्यकर्ताओं के आग्रह पर सेवा जारी रखी।
मातृभाषा पर सख्त रुख
उन्होंने कहा कि अंग्रेजी सीखना गलत नहीं, लेकिन मातृभाषा का त्याग नहीं होना चाहिए। संघ के भीतर मातृभाषा के प्रयोग पर जोर दिया जाएगा। मुस्लिम समाज के संदर्भ में उन्होंने कहा कि वे भी समाज का अभिन्न हिस्सा हैं। स्वयंसेवक सेवा कार्यों के माध्यम से सभी वर्गों तक पहुंचते हैं।
धर्मांतरण, घुसपैठ और रोजगार
भागवत ने स्पष्ट कहा कि लालच या दबाव में धर्मांतरण गलत है। घुसपैठ रोकना सरकार की जिम्मेदारी है और रोजगार देश के नागरिकों को मिलना चाहिए। उन्होंने मानव-केंद्रित तकनीक और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन पर जोर दिया।
आरक्षण और सामाजिक संतुलन
संविधान सम्मत आरक्षण का समर्थन करते हुए उन्होंने सामाजिक सद्भाव को आगे बढ़ाने की अपील की। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के हालिया वक्तव्य को संगठन की वैचारिक दिशा के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ में नेतृत्व का आधार जाति नहीं, बल्कि कार्य और योग्यता है।
संगठनात्मक सिद्धांत
भागवत ने दोहराया कि संघ प्रचार से नहीं, संस्कार से चलता है। व्यक्ति-पूजा से बचना और कार्य-आधारित पहचान बनाना संगठन की प्राथमिकता है। मातृभाषा को राष्ट्रीय आत्मा से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि अंग्रेजी का ज्ञान उपयोगी है, पर अपनी भाषा का सम्मान सर्वोपरि है।
सामाजिक समरसता
मुस्लिम समाज, आरक्षण और जातिगत भेदभाव पर उन्होंने संतुलित दृष्टिकोण रखा। उनका कहना था कि समाज में पीछे रह गए वर्गों को आगे लाना सामूहिक जिम्मेदारी है।
नीति और शासन से जुड़े संकेत
घुसपैठ, जनसंख्या संतुलन और रोजगार जैसे मुद्दों पर उन्होंने सरकार की भूमिका और समाज की भागीदारी दोनों पर जोर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान संगठन की भविष्य की रणनीति और सामाजिक संवाद को दिशा देने वाला है।
इसे भी पढ़े- पवन खेड़ा की कोर्ट में होगी पेशी, ट्रांजिट रिमांड पर असम ले जाएगी पुलिस





