Tuesday, March 10, 2026
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बांग्लादेश की सियासत में नया संग्राम: राष्ट्रपति पर जमात प्रमुख का तीखा हमला

बांग्लादेश में हाल ही में संपन्न आम चुनावों के बाद नई सरकार का गठन हो चुका है और बीएनपी प्रमुख तारिक रहमान ने देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली है। हालांकि सत्ता परिवर्तन के बावजूद देश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन द्वारा मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाले अंतरिम प्रशासन पर लगाए गए आरोपों के बाद अब जमात-ए-इस्लामी भी खुलकर मैदान में उतर आई है।


राष्ट्रपति के बयान पर जमात-ए-इस्लामी का पलटवार

जमात-ए-इस्लामी के अमीर शफीकुर रहमान ने राष्ट्रपति शहाबुद्दीन के बयान को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर पोस्ट करते हुए सवाल उठाया कि अगर राष्ट्रपति के साथ अन्याय हो रहा था, तो उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता छोड़ने से जुड़े तथ्यों को पहले स्पष्ट क्यों नहीं किया।


5 अगस्त 2024 को लेकर उठे गंभीर सवाल

शफीकुर रहमान ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति ने 5 अगस्त 2024 की घटनाओं से जुड़ी कई अहम जानकारियों को सार्वजनिक नहीं किया। उन्होंने कहा कि उस दिन शेख हसीना के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति ने राजनीतिक नेताओं से क्या बातचीत की और देश को क्या जानकारी दी—इन दोनों में बड़ा अंतर है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस बात को राष्ट्रपति अब सामने ला रहे हैं, उसका जिक्र उन्होंने उस समय अपने राष्ट्र संबोधन में नहीं किया था।


इस्तीफे पर बदला गया राष्ट्रपति का रुख

गौरतलब है कि 5 अगस्त को शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए उनके इस्तीफे को स्वीकार करने की बात कही थी। लेकिन करीब दो महीने बाद उन्होंने यह कहते हुए नया बयान दिया कि उन्होंने केवल इस्तीफे की खबर सुनी थी, उनके पास इसका कोई लिखित प्रमाण नहीं था।


यूनुस प्रशासन पर भी राष्ट्रपति के गंभीर आरोप

राष्ट्रपति शहाबुद्दीन इससे पहले मोहम्मद यूनुस पर भी कई गंभीर आरोप लगा चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि यूनुस प्रशासन ने बांग्लादेश और अमेरिका के बीच एक गोपनीय समझौता किया, जिसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई। उनका कहना था कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते से पहले राष्ट्रपति को अवगत कराना संवैधानिक जिम्मेदारी है, लेकिन इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।


बीएनपी और सशस्त्र बलों का मिला समर्थन

राष्ट्रपति ने यह भी स्वीकार किया कि राजनीतिक अस्थिरता और प्रदर्शनों के दौरान वह अपने पद पर बने रह सके, तो इसके पीछे बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और सशस्त्र बलों का समर्थन अहम रहा।

उन्होंने बताया कि बीएनपी के शीर्ष नेताओं ने उन्हें आश्वासन दिया था कि राष्ट्रपति को असंवैधानिक तरीके से हटाने की किसी भी कोशिश का समर्थन नहीं किया जाएगा।


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