खबर संसार, नई दिल्ली: भगवान shiv पर जरूर चढ़ाएं बेलपत्र, जटिल समस्याएं रहेंगी दूर। आज श्रावण माह का तीसरा सोमवार है, क्या आपको पता है, भगवान शिव पर बेलपत्र क्यों चढ़ाया जाता है। किसी भी shiv के त्योहार पर शिवलिंग पर बेलपत्र, दूध, जल, भस्म, धतूरा, दूध, भांग और शहद आदि अर्पित किया जाता है।
बता दें कि जब समुद्र मंथन के बाद विष निकला तो भगवान shiv ने पूरी सृष्टि को बचाने के लिए ही इस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया। बेलपत्र विष के प्रभाव को कम करता है इसलिए सभी देवी देवताओं ने बेलपत्र शिवजी को खिलाना शुरू कर दिया।
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बेलपत्र के साथ साथ शिव को शीतल रखने के लिए उन पर जल भी अर्पित किया गया। बेलपत्र और जल के प्रभाव से भोलेनाथ के शरीर में उत्पन्न गर्मी शांत होने लगी और तभी से शिवजी पर जल और बेलपत्र चढ़ाने की प्रथा चल पड़ी।
shiv पर बेलपत्र का महत्व
1. बेलपत्र में तीन पत्तियां होती हैं। मान्यता अनुसार इन तीन पत्तियों को तीन गुणों सत्व, रज और तम से जोड़कर देखा जाता है। इन्हें ही त्रिदेव (सृजन, पालन और विनाश) का रूप भी माना जाता है। बेलपत्र की इन तीन पत्तियों को महादेव shiv की तीन आंखें या उनके शस्त्र त्रिशूल का भी प्रतीक माना जाता है।
2. शिवलिंग पर प्रतिदिन बेलपत्र चढ़ाने से सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं और कभी भी आर्थिक तंगी नहीं रहती है। बेलपत्र को तिजोरी में रखने से भी बरकत आती है।
3. जीवन में सिर्फ एक बार और वो भी यदि भूल से भी shiv लिंग पर बेल पत्र चढ़ा दिया है, तो भी उसके सारे पाप मुक्त हो जाते है बिल्व वृक्ष के आसपास सांप नहीं आते।
4. अगर किसी की शव यात्रा बिल्व वृक्ष की छाया से होकर गुजरे तो उसका मोक्ष हो जाता है
5. वायुमंडल में व्याप्त अशुध्दियों को सोखने की क्षमता सबसे ज्यादा बिल्व वृक्ष में होती है
6. चार पांच छः या सात पत्तो वाले बिल्व पत्रक पाने वाला परम भाग्यशाली और शिव को अर्पण करने से अनंत गुना फल मिलता है
7. बेल वृक्ष को काटने से वंश का नाश होता है।और बेल वृक्ष लगाने से वंश की वृद्धि होती है।
8. सुबह शाम बेल वृक्ष के दर्शन मात्र से पापो का नाश होता है।
9. बेल वृक्ष को सींचने से पितर तृप्त होते है।
10. बेल वृक्ष और सफेद आक् को जोड़े से लगाने पर अटूट लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
11. बेल पत्र और ताम्र धातु के एक विशेष प्रयोग से ऋषि मुनि स्वर्ण धातु का उत्पादन करते थे ।


