भाविश अग्रवाल द्वारा स्थापित ओला ने राइड-हेलिंग इंडस्ट्री में क्रांतिकारी बदलाव करते हुए पूरे भारत में शून्य-कमीशन मॉडल लागू कर दिया है। इस निर्णय के बाद अब ऑटो, बाइक और टैक्सी ड्राइवर अपने यात्रियों से मिलने वाले पूरे किराए पर अपना अधिकार रख सकेंगे। इससे 1 मिलियन से अधिक ड्राइवर-भागीदारों को आर्थिक रूप से फायदा होगा।
ड्राइवरों को मिलेगी पूरी कमाई
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, ओला का यह नया मॉडल ड्राइवरों को अपनी पसंद की योजना चुनने और उनकी कमाई पर पूर्ण नियंत्रण की सुविधा देता है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि न तो कोई कमीशन लिया जाएगा, न ही आय पर कोई सीमा निर्धारित की गई है। यह कदम ड्राइवरों को अधिक स्वायत्तता और वित्तीय स्थिरता प्रदान करने की दिशा में बढ़ाया गया है।
चरणबद्ध तरीके से लागू हुआ नया सिस्टम
ओला ने इस पहल को चरणों में शुरू किया – पहले ऑटो, फिर बाइक और अंत में कैब्स के साथ। इस योजना के तहत ड्राइवर ओला के प्लेटफॉर्म का उपयोग करने के लिए एक निश्चित दैनिक या मासिक शुल्क अदा करेंगे, लेकिन राइड से होने वाली पूरी कमाई उनके पास रहेगी। इससे पूर्व कंपनी 15-20% तक का कमीशन लेती थी।
सुरक्षा और पारदर्शिता को भी प्राथमिकता
ड्राइवरों की पृष्ठभूमि जांच, वाहन गुणवत्ता मूल्यांकन और इन-ऐप इमरजेंसी फीचर्स जैसे उपायों के साथ ओला यात्री सुरक्षा पर भी जोर देती है। यह नया मॉडल न केवल ड्राइवरों के लिए लाभकारी है, बल्कि यह कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को भी और मजबूत करता है।
राइड-हेलिंग इंडस्ट्री में गेमचेंजर साबित होगा यह कदम
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह शून्य-कमीशन मॉडल रैपिडो और नम्मा यात्री जैसे प्रतिस्पर्धियों के समान है, जो पहले से ही सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस मॉडल अपना चुके हैं। 2024 में भारत के राइड-हेलिंग सेक्टर का अनुमानित राजस्व 7.53 बिलियन डॉलर है, जो 2029 तक 11.64 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। ऐसे में ओला का यह कदम उद्योग को अधिक समावेशी और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
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