ईरान के साथ लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिकी सेना को कई नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने सैनिकों की सेहत और प्रदर्शन को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है, जिसकी चर्चा दुनियाभर में हो रही है।
ईरान हमले से पहले सैनिकों ने दी थी चेतावनी
1 मार्च 2026 को ईरान ने कुवैत के शोएब इंटरनेशनल बंदरगाह को निशाना बनाया। इससे पहले वहां तैनात अमेरिकी सैनिकों ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को आगाह किया था कि उनकी पोजीशन ईरान के निशाने पर आ सकती है। हालांकि सैनिकों की इस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया गया और बाद में वही स्थिति सामने आई जिसकी आशंका जताई गई थी।
लंबे संघर्ष का सैनिकों की क्षमता पर असर
ईरान के साथ लगातार बढ़ते टकराव के कारण अमेरिकी सैनिक मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर अभूतपूर्व दबाव का सामना कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि इसका असर उनकी सैन्य क्षमता पर भी पड़ रहा है। इसी परिस्थिति को देखते हुए अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने सैनिकों की स्वास्थ्य निगरानी के लिए एक नया कदम उठाया है, जिसने वैश्विक स्तर पर बहस छेड़ दी है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी
ईरान पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका ने अपनी आधे से अधिक सैन्य बल को मध्य-पूर्व में तैनात कर रखा है। इस अभियान के तहत अमेरिकी नौसेना, वायुसेना और जमीनी सेना को क्षेत्र में सक्रिय किया गया है ताकि ईरान की घेराबंदी की जा सके।
रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का बड़ा ऐलान
इसी बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने घोषणा की है कि अमेरिकी सैनिकों के लिए सालाना टेस्टोस्टेरॉन स्क्रीनिंग शुरू की जाएगी। टेस्टोस्टेरॉन पुरुषों में पाया जाने वाला महत्वपूर्ण हार्मोन है, जो शारीरिक ताकत, सहनशक्ति और प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाता है।
30 वर्ष से अधिक उम्र के सैनिकों के लिए अनिवार्य होगी जांच
‘द हिल’ की रिपोर्ट के अनुसार, 30 वर्ष या उससे अधिक उम्र के सैनिकों के लिए टेस्टोस्टेरॉन स्क्रीनिंग को नियमित स्वास्थ्य परीक्षण का हिस्सा बनाया जाएगा। वहीं 30 वर्ष से कम आयु के सैनिक अपनी इच्छा के अनुसार यह जांच करा सकेंगे।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए वीडियो संदेश में पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका अपने हथियारों और सैन्य उपकरणों पर भारी निवेश करता है, लेकिन उसकी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत हमेशा उसके सैनिक ही रहेंगे।
सैनिकों के प्रदर्शन और सेहत पर रहेगा फोकस
हेगसेथ ने अपने वीडियो संदेश को “High-T Department of War” शीर्षक दिया। उन्होंने कहा कि सैनिकों की कार्यक्षमता, सहनशक्ति और दीर्घकालिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखना रक्षा विभाग का महत्वपूर्ण दायित्व है। इसी उद्देश्य से नए स्वास्थ्य उपायों पर लगातार काम किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि वैज्ञानिक रूप से यह स्थापित तथ्य है कि बढ़ती उम्र के साथ टेस्टोस्टेरॉन का स्तर स्वाभाविक रूप से कम होने लगता है। इसलिए स्क्रीनिंग कार्यक्रम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सैनिकों में इस हार्मोन का स्तर उचित बना रहे ताकि वे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें।
क्या है अमेरिका का टेस्टोस्टेरॉन स्क्रीनिंग प्रोग्राम?
नए कार्यक्रम के तहत 30 वर्ष या उससे अधिक उम्र के सभी सैनिकों के लिए सालाना हेल्थ असेसमेंट के दौरान टेस्टोस्टेरॉन जांच अनिवार्य होगी। वहीं 30 वर्ष से कम उम्र के सैनिक स्वैच्छिक रूप से इस जांच में शामिल हो सकेंगे।
अमेरिकी रक्षा मंत्री के अनुसार, इस पहल का मकसद सैनिकों में टेस्टोस्टेरॉन की कमी की समय रहते पहचान करना और उनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को कम करना है।
कम स्तर मिलने पर दी जाएगी TRT थेरेपी
यदि किसी सैनिक का टेस्टोस्टेरॉन स्तर तय मानक से कम पाया जाता है, तो उसे टेस्टोस्टेरॉन रिप्लेसमेंट थेरेपी (TRT) देने का विकल्प उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि यह उपचार किसी पर भी अनिवार्य रूप से लागू नहीं किया जाएगा।
मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, TRT थेरेपी जेल, इंजेक्शन, स्किन पैच या मुंह से ली जाने वाली टैबलेट के माध्यम से दी जा सकती है। इसका उद्देश्य सैनिकों में टेस्टोस्टेरॉन के स्तर को सामान्य बनाए रखने में मदद करना है।
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