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कर्नाटक में खत्म हुआ धर्मांतरण विरोधी कानून, कांग्रेस ने पलटा BJP का फैसला

सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने पिछली भाजपा सरकार द्वारा राज्य में पेश किए गए धर्मांतरण विरोधी विधेयक के खिलाफ कानून को रद्द करने का फैसला किया है। राज्य के कानून और संसदीय मामलों के मंत्री एचके पाटिल ने कहा कि प्रस्ताव को आज राज्य कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। इसे बदलने के लिए एक विधेयक बाद में सितंबर में राज्य विधानसभा में पेश किया गया था।

पाटिल ने यह भी कहा कि कैबिनेट ने स्कूली इतिहास की किताबों से केबी हेडगेवार के अध्यायों को हटाने का फैसला किया है, जो भाजपा के वैचारिक संरक्षक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापकों में से एक हैं। अध्याय पिछले साल जोड़ा गया था। साथ ही भाजपा सरकार द्वारा स्कूली पाठ्यक्रम में किए गए सभी बदलावों को भी उलट दिया गया है।

पाटिल ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि मंत्रिमंडल ने स्कूलों और कॉलेजों में भजन के साथ संविधान की प्रस्तावना को पढ़ना अनिवार्य करने का भी फैसला किया है।  कैबिनेट ने कृषि बाजारों (APMC) पर एक नया कानून लाने का भी फैसला किया है, जो भाजपा के सत्ता में रहने के दौरान बनाए गए कानून की जगह लेगा।

भाजपा ने 2022 में पारित किया था धर्मांतरण विरोधी विधेयक

बता दें की भाजपा की सरकार ने 21 सितम्‍बर 2022 को धर्मांतरण विरोधी विधेयक (Anti-Conversion Bill) पारित किया गया था। इस विधेयक को पिछले सप्ताह विधान परिषद ने मामूली संशोधनों के साथ पारित किया था, जिसमें विधेयक को प्रभावी बनाने के लिए मौजूद अध्यादेश को बदलने की मांग की गई थी।

व‍िधेयक में क्‍या था प्रावधान?

विधेयक में गलत व्याख्या, बलात, किसी के प्रभाव में आकर, दबाव, प्रलोभन या किसी अन्य गलत तरीके से धर्मांतरण करने पर सजा का प्रावधान है। इसके तहत दोष साब‍ित होने पर तीन से पांच साल की सजा और 25 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा पीड़ित पक्ष नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति या जनजाति का होने पर तीन से दस साल की सजा और 50 हजार रुपये या उससे अधिक जुर्माने का प्रावधान है।

अवैध रूप से धर्मांतरण कर शादी भी हो सकती है रद्द

विधेयक के अनुसार, दोष साब‍ित होने पर आरोपी को धर्मांतरित व्यक्ति को पांच लाख रुपये तक मुआवजा देना पड़ सकता है। सामूहिक स्तर पर धर्मांतरण कराने पर तीन से 10 साल जेल की सजा और एक लाख रुपये तक जुर्माना अदा करना पड़ सकता है। विधेयक के अनुसार, अवैध रूप से धर्मांतरण करवाने के उद्देश्य से की गई शादी को पारिवारिक अदालत की ओर से रद्द किया जा सकता है।

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