HomeNational365 दिन में 100 ब्रह्मोस! भारत की मिसाइल ताकत ने मचाया तहलका

365 दिन में 100 ब्रह्मोस! भारत की मिसाइल ताकत ने मचाया तहलका

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थापित ब्रह्मोस मिसाइल प्लांट से अब आधिकारिक रूप से मिसाइलों की डिलीवरी शुरू हो चुकी है। यह प्लांट उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का अहम हिस्सा है, जो देश की रक्षा उत्पादन क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अक्टूबर 2025 में यहां पहली बार चार ब्रह्मोस मिसाइलों का बैच तैयार किया गया था, और अब इनकी आपूर्ति भी शुरू हो गई है।

हर साल 100 मिसाइल बनाने की क्षमता

लखनऊ स्थित यह अत्याधुनिक प्लांट हर वर्ष लगभग 80 से 100 ब्रह्मोस मिसाइलों के उत्पादन में सक्षम है। इससे भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना को समय पर मिसाइलों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। साथ ही, सप्लाई चेन भी पहले की तुलना में अधिक मजबूत और तेज बनेगी।

ब्रह्मोस मिसाइल की खासियत क्या है

ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जो ध्वनि की गति से कई गुना तेज उड़ान भरती है। इसे जमीन, समुद्र और हवा—तीनों प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है। इसकी गति और सटीकता इसे भारतीय सशस्त्र बलों के लिए बेहद घातक और प्रभावी हथियार बनाती है।

उत्पादन में बढ़ोतरी से मिलेगा रणनीतिक लाभ

पहले ब्रह्मोस मिसाइलों का निर्माण मुख्य रूप से हैदराबाद समेत कुछ अन्य स्थानों पर होता था। अब लखनऊ में नए प्लांट के शुरू होने से उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे तीनों सेनाओं को तेजी से मिसाइलें मिलेंगी और रक्षा तैयारियों को और मजबूती मिलेगी।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम

सरकार का फोकस ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण में अब करीब 70% लोकल कंटेंट का इस्तेमाल हो रहा है, जो पहले की तुलना में काफी अधिक है। इसका मतलब है कि भारत धीरे-धीरे रक्षा उपकरणों के लिए विदेशी निर्भरता कम कर रहा है।

रक्षा उत्पादन और निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

वित्त वर्ष 2025 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन 1.5 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। वहीं, रक्षा निर्यात भी तेजी से बढ़ते हुए 2025-26 में 38,000 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। यह संकेत देता है कि भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का आयातक नहीं, बल्कि निर्यातक देश के रूप में उभर रहा है।

चुनौतियां अभी भी बाकी

हालांकि इस प्लांट की वार्षिक उत्पादन क्षमता 80-100 मिसाइल है, जो तीनों सेनाओं की जरूरतों के मुकाबले कम हो सकती है। साथ ही, कुछ अहम पार्ट्स के लिए अभी भी विदेशी निर्भरता बनी हुई है। बावजूद इसके, यह पहल आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।

रक्षा मंत्री का बयान और आगे की रणनीति

हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा है कि भारत रक्षा क्षेत्र में पूर्ण आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। देशभर में छोटे-बड़े रक्षा उद्योग स्थापित किए जा रहे हैं, जिनका लक्ष्य घरेलू उत्पादन को बढ़ाना है।

निष्कर्ष: बढ़ती ताकत का प्रतीक

लखनऊ से ब्रह्मोस मिसाइलों की डिलीवरी सिर्फ एक सप्लाई प्रक्रिया नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती सैन्य शक्ति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। आने वाले समय में यह कदम देश की रक्षा क्षमता को और सशक्त बनाएगा।


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