अहमदाबाद, गुजरात: गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में हुए दर्दनाक विमान हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। लेकिन इस हादसे में विश्वास रमेश का जिंदा बच जाना किसी चमत्कार से कम नहीं था। प्लेन के बी.जे. हॉस्टल की छत पर गिरने और आग की ऊंची लपटें उठने के बावजूद रमेश खुद अपने पैरों पर चलकर बाहर निकले। हादसे के बाद उन्होंने अपनी आपबीती सुनाई, जो किसी फिल्मी सीन से कम नहीं लगती।
1. ‘मुझे लगा मैं भी मर जाऊंगा’
जानकारी के अनुसार विश्वास रमेश ने कहा, “सब कुछ मेरी आंखों के सामने हुआ। कुछ पल के लिए लगा कि अब मैं भी मरने वाला हूं। लेकिन जैसे ही होश आया, मैंने खुद को जीवित पाया और तुरंत सीट बेल्ट खोलकर बाहर निकलने की कोशिश की।”
2. ‘टेकऑफ के कुछ सेकंड बाद ही हुआ हादसा’
उनके अनुसार, प्लेन ने जैसे ही टेकऑफ किया, 5-10 सेकंड में सब कुछ बदल गया। “एकाएक विमान की गति थमी हुई सी लगी, फिर हरे और सफेद रंग की लाइटें जल उठीं। ऐसा लगा जैसे पायलट विमान को ऊपर उठाने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन तभी प्लेन नीचे गिर गया,” उन्होंने कहा।
3. ‘जहां गिरा, वहां जमीन थी – छत नहीं’
विश्वास बताते हैं कि प्लेन बी.जे. हॉस्टल की छत से टकराया, लेकिन वे खुद ज़मीन पर गिरे थे। “जहां मैं गिरा, वहां थोड़ा सा स्पेस था। उसी स्पेस से निकलकर मैं बाहर आने में सफल रहा,” उन्होंने कहा।
4. ‘मुझे नहीं पता कैसे बच पाया’
रमेश का कहना है कि “वहां आग लगी थी, दीवारें थीं, पर मुझे नहीं पता कि मैं कैसे बच पाया। मैं जिस जगह पर था, वहीं से थोड़ा सा रास्ता मिला और मैं बाहर निकल सका। बाकी जगह ज्यादा नुकसान हुआ।”
5. ‘हाथ जल गया, लेकिन जान बच गई’
आग की चपेट में आने से रमेश का एक हाथ झुलस गया। “जैसे ही मैं बाहर निकला, एंबुलेंस मुझे अस्पताल लेकर गई। अब मेरा इलाज चल रहा है और हालत बेहतर है,” उन्होंने बताया।
यह हादसा जितना दर्दनाक था, उतनी ही अविश्वसनीय रही विश्वास रमेश की जीवित बच निकलने की कहानी। यह एक बार फिर साबित करता है कि कभी-कभी किस्मत भी बड़ी चीज होती है।
इसे भी पढ़े-मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रानीबाग स्थित एचएमटी फैक्ट्री का निरीक्षण किया
हमारे फेसबुक पेज से जुड़ने के लिए क्लिक करें
