वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और ईरान-अमेरिका तनाव के बीच मार्च 2026 करेंसी मार्केट के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। इस दौरान भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे कमजोर स्तर पर पहुंच गया। वहीं, चौंकाने वाली बात यह रही कि अफगानिस्तान की मुद्रा अफगानी ने इस अवधि में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया।
रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा भारतीय रुपया
मार्च के दौरान रुपये पर लगातार दबाव बना रहा। डॉलर के मुकाबले इसकी कीमत 95 के पार निकलकर 95.22 तक पहुंच गई। वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, रुपये में करीब 9.88% की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले 14 वर्षों की सबसे बड़ी सालाना गिरावट मानी जा रही है।
अफगानी करेंसी ने दिखाई मजबूती
दूसरी ओर, अफगानिस्तान की मुद्रा अफगानी ने स्थिरता और मजबूती का प्रदर्शन किया। अफगान सेंट्रल बैंक के मुताबिक, 20 मार्च 2026 तक के एक साल में अफगानी डॉलर के मुकाबले करीब 9.93% मजबूत हुई। हालांकि महीने की शुरुआत में इसमें हल्की गिरावट देखी गई, लेकिन अंत तक यह स्थिर बनी रही।
मौजूदा एक्सचेंज रेट क्या कहते हैं?
मार्च 2026 के अंत तक विनिमय दर कुछ इस प्रकार रही:
1 भारतीय रुपया ≈ 0.67 अफगानी
इसका मतलब है कि यूनिट वैल्यू के हिसाब से रुपया अफगानी से कमजोर स्थिति में है। हालांकि भारत की अर्थव्यवस्था आकार में बड़ी है, लेकिन करेंसी की मजबूती के मामले में अफगानी फिलहाल आगे दिख रही है।
क्यों कमजोर हुआ भारतीय रुपया?
1. विदेशी निवेश की निकासी
विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से भारी मात्रा में पैसा निकाला, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ा।
2. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
पश्चिम एशिया में तनाव के कारण तेल की कीमतें $105-$115 प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जिससे भारत का आयात खर्च बढ़ गया।
3. अमेरिकी टैरिफ का असर
अमेरिका द्वारा लगाए गए व्यापारिक प्रतिबंधों ने भी रुपये को कमजोर करने में भूमिका निभाई।
4. बढ़ता व्यापार घाटा
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई, जिससे चालू खाता घाटा बढ़ा।
अफगानी करेंसी मजबूत क्यों रही?
1. सख्त मौद्रिक नीति
अफगान सेंट्रल बैंक ने बाजार में डॉलर की आपूर्ति को नियंत्रित रखा और उतार-चढ़ाव कम किया।
2. डिजिटल बैंकिंग का विस्तार
नए नोट और डिजिटल लेनदेन के बढ़ते उपयोग से मुद्रा संतुलन बेहतर बना।
3. सीमित वैश्विक जुड़ाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार से कम जुड़ाव होने के कारण अफगानी करेंसी पर वैश्विक दबाव कम पड़ा। मार्च 2026 के आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि जहां भारतीय रुपया बाहरी आर्थिक और भू-राजनीतिक दबावों के कारण कमजोर हुआ, वहीं अफगानी करेंसी ने नियंत्रित नीतियों और सीमित जोखिम के चलते स्थिरता बनाए रखी। यह ट्रेंड आने वाले समय में भी करेंसी मार्केट पर असर डाल सकता है।
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