खबर संसार नेहा शर्मा हरिद्वार। कोरोना काल में सेहत और रोजगार सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। लोगो की रातों की नींद उड़ गई है। चिकित्सक इसे कॉविड सोमनिया का नाम दे रहे है।
वर्तमान समय में नींद न आना कोवीड सोमनिया
ये सबसे पहले आपकी नींद पर हमला कर रहा। कंधो पर घर के लालन-पालन का भार, आंखों में नौकरी की चिंता, सामने बच्चों की पढ़ाई। ये ऐसे विचार हैं जो किसी भी स्वस्थ से स्वस्थ व्यक्ति की नींद छीन सकते हैं। और ऐसे ही अनेक विचारों ने न जाने कितने ही लोगों की नींद और चैन छीन लिया है। दो साल के इस कोरोना काल में लोगों ने ऐसे-ऐसे दिन देखे हैं, जिससे हर इंसान की जिंदगी का रुख ही मुड़ गया। इसमें न जाने कितनों ने अपनों को खो दिया, न जाने कितनों की नौकरी चली गई, कितने ही ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी पूरी जमा-पूंजी लगाकर व्यापार शुरू किया और वो ठप हो जाने से वे बर्बाद हो गए।
इन दो सालों की उठा-पटक ने अधिकतर लोगों को सिवाय चिंता के कुछ और नहीं दिया, जिस कारण लोग पूरी तरह सो भी नहीं पा रहे हैं। पूरी रात बिस्तर पर होने के बावजूद आंखों से नींद कोसों दूर हो गई है। इस कारण लोगों के शारीरिक स्वास्थ्य पर तो असर पड़ा ही है, लेकिन उससे भी ज्यादा उनकी मानसिक सेहत गड़बड़ाई है। तमाम लोग अवसाद का शिकार हुए हैं। उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हुई है। नींद न आने और मोबाइल में घंटों-घंटों लगे रहने से आंखों पर भी विपरीत असर पड़ा है। न्यूरोलॉजी के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने इस स्थिति को ‘कोविड सोमनिया’ का नाम दिया है। एक अमेरिकन सर्वे में 70 फीसदी लोगों ने इसकी शिकायत होने की बात स्वीकार की। 56 फीसदी ने माना कि उनकी आधी रात करवटें बदलने में गुजरी। 51 फीसदी ने नींद के लिए दवाओं का सहारा लेने की बात कुबूल की ।
