हल्द्वानी खबर संसार मीना अरोड़ा। गड्ढे की गोद भराई कल एक बड़े से गड्ढे से मुलाकात हो गई। अपने बड़े से स्वरूप पर इतरा रहा था। मैंने पूछा:-“भाई, तुम सड़क के बीचों-बीच क्यों पड़े हो। तुम्हें नहीं पता कि तुम्हारी वजह से आने जाने वालों को तकलीफ़ हो रही है। वैसे मुझे याद आ रहा है जब मैं पिछले सप्ताह गुजरी थी तब तुम सात या आठ का रेडियस लिए गोल थे, पर अब तुम्हारी आकृति त्रिकोणीय, अष्टकोणीय या फिर इससे भी कहीं आगे निकल गयी है।”
गड्ढे की गोद भराई पर व्यंग
गड्ढा मेरी ओर देख कर मंद मुस्कुराया और बोला:-“मैडम विकास का दौर चल रहा है। जाहिर सी बात है मेरी शेप भी विकास ले रही है।”
मैंने कहा:-“भाई, मुझे तुम्हारा विकास नहीं देश का विकास चाहिए। कोई ऐसा मार्ग बताओ जिसमें तुम्हारा और हमारा दोनों का भला हो जाए।”
मेरी बात सुनकर वह जोर से हंसा और बोला:-“दोनों का भला ही तो विकास में बाधक है।”
मैंने आंखें चौड़ी कर कहा:-” मतलब?”
वह बोला:-“मतलब स्पष्ट है देश में विकास के कार्य इसीलिए रुके हैं क्योंकि सब एक दूसरे का भला सोच कर कार्य को समाप्त नहीं करते।एक सोचता है कि यदि मेरे हाथों कार्य का उद्धार हो गया तो भविष्य में आने वाला दूसरा कहीं निकम्मा न हो जाए।बस यही उदारवादी नीतियां ही विकास कार्यों में बाधक बनी हुई हैं।”
उसका बुद्धिमानी पूर्ण तर्क सुनकर मैंने कहा:-” “काफी विद्वान प्रतीत हो रहे हो।”
वह जोर से हंस कर बोला:-“मैडम,आजकल विद्वान गड्ढों में ही पाए जा रहे हैं। ऊंचे पदों पर तो……
मैंने उसकी बात बदलते हुए कहा:-“तुम्हें कभी अपने गढ्डेपने पे इश्क हुआ है?”
वह लजाते हुए बोला :-” हां, अभी कल ही तो जब सावन की बूंदों ने मुझे जल से सराबोर किया और अचानक रिक्शे पर सवार दो खूबसूरत नारियां मेरे कुंड में स्नान करने को तैर गयीं तो……”
मैंने हैरानी भरे स्वर में पूछा:-“अरे वो कैसे?”
वह बोला:-“कैसे वैसे नहीं पता बस रिक्शा का पहिया लड़खड़ाया और फिर…आज रपट जाएं …..हो गया।सच कहूं तो बड़ा मजा आया।मेरा तो जी कर रहा था उन्हें आगोश से जाने न दूं पर सामने से आते ट्रक ने उन्हें उठ कर भागने पर विवश कर दिया।
मुझे उस ट्रक पर इतना क्रोध आया कि मैंने उसका एक टायर कसके पकड़ लिया।”
मैंने कहा:-“फिर?”
” फिर शहर के विपक्षियों ने धरना दिया। मुझे भरवाने को लेकर
आत्म दाह की धमकी दी मतलब ब्लैकमेल किया और सत्ता पर काबिजों ने वादा किया कि कल ही भराव होगा, तब जाकर मैंने ट्रक का पांव मेरा मतलब टायर छोड़ा।”
मैंने आश्चर्यचकित होकर कहा:-“पर… भराव कहां है?”
वह बोला:-“अब क्या बताएं मैडम, ब्लैकमेल और वादा खिलाफी भी एक दूसरे से गठबंधन किए हुए हैं।
सिर्फ धमकी मिली थी।”
मैं बोली:-“मतलब तुम्हें विपक्ष की धमकी से भय लगता है?”
वह इतराते हुए बोला :-“कतई नहीं, मेरा तो जन्म ही ब्लैकमेल काल में हुआ था। विकास, घोषणाओं के काल में हुआ है।”
मैंने फुसफुसाते हुए कहा :-“कुछ रेता सीमेंट खा पी कर चलते बनो।”
वह जोर से हंसा और बोला:-” खान पान के चक्कर में ही दो का चार और चार का चालीस हुआ है। मैडम,मेरा तो पूरा परिवार इस सड़क पर बिछा है इस पच्चीस तीस किलोमीटर लंबी सड़क पर मेरे मोटे तगड़े भाई -बहन और नन्हें नन्हें बच्चे पल रहे हैं।”
मैंने हंस कर कहा “अच्छा और जन्मदाता?”
वह सोचकर बोला:-” वे मेरा आहार खाकर ही शानदार मजबूत कोठियों में पल रहे हैं।”
मैंने झल्लाते हुए कहा:-“ओहो, मतलब तुम्हारे खात्मे की
कोई संभावना नहीं है?”
वह बोला:-“हमें खत्म करने वाले खा खा कर खत्म हो तो रहे हैं। मैं तो कहता हूं…..
मैंने उसकी बात काटते हुए कहा:-“अरे छोड़ो! विषय से मत भटको, यह बताओ तुम्हें सड़क से कैसे विदा किया जाए?”
वह चुटकी लेते हुए बोला:-“गोद भराई करवा दो।”
मैंने कहा:-“गोद भराई! अरे भाई गोद भराई उनकी होती है जिनकी गोद में पहले से कुछ होता है और तुम्हारा तो पेट ही गायब है।”
वह रुआंसा होते हुए बोला:-“जो पेट तुम्हें गायब दिख रहा है वो पेट कई लाल लील गया है। पिछले माह आज के दिन इस मरदूद सड़क से एक नौजवान मोटरसाइकिल सवार, तेजी से गुजर रहा था मुझ तक पहुंचते ही मेरे उदर में आ समाया।”
“ओहहहह, फिर??”
“फिर क्या कुछ नहीं थोड़ा हो हल्ला,परिजनों और हितैषियों की नगर प्रशासन,पी डब्ल्यू डी के कर्मचारियों को गालियां।
लोकल विपक्षियों का मुजरा , तमाशबीनों का जमावड़ा और फिर सब शांत।पर …..नौजवान की मां छाती कूट कर रोते हुए –विकास, विकास चिल्ला रही थी।शायद विकास को कोस रही थी।”कहते कहते उसके नयन गीले हो गए।
मैंने भरे गले से कहा:-“नहीं,जिसका लाल जाता है उसे उस समय विकास का नारा याद नहीं आता। अवश्य ही उसके लाल का नाम विकास होगा। बेहतर तो यह होता कि लोग पहले चिल्लाते।पर खैर तुम जाने दो।जब तक इंसान अपने फर्ज नहीं निभाते मेरा निवेदन है तुम किसी को मरने मत देना।”
गढ्डा अश्वासन भरे स्वर में बोला:-“मैं कोशिश करूंगा कि मेरी बदनामी न हो, लोग यह न कहें कि इस गढ्डे की वजह से ……”
इससे पहले कि वह कुछ और कहता एक तेज रफ्तार गाड़ी को गढ्डे की ओर बढ़ते देख मैं वहां से तेजी से हट गयी। गाड़ी, गढ्डे में प्रवेश कर पलट गई।उसमें सवार लोगों में चीख-पुकार मच गयी।
गढ्डा उनको बचाने के लिए हाथ पांव मार रहा था।
मैंने दूर से देखा तो गाड़ी पर पी डब्ल्यू डी लिखा था।
मैं हौले से बुदबुदाई:-“लो ,अब हो जायेगी गढ्डे की गोद भराई।”
