मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच तनाव लगातार हिंसक रूप लेता जा रहा है। नौ दिनों से जारी इस युद्ध में दोनों देश एक-दूसरे पर लगातार हमले कर रहे हैं। ईरान ने इजरायल के प्रमुख शहरों—तेल अवीव, बीरसेबा और हाइफा—पर ताबड़तोड़ मिसाइलें दागीं। हाइफा पर हुए हमले में 23 लोग घायल हुए, जिनमें तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है। हालांकि, इजरायली सेना ने दावा किया है कि उसने ईरान की 16 मिसाइलों को हवा में ही इंटरसेप्ट कर गिरा दिया।
रूस का खुला समर्थन, अमेरिका से मदद की उम्मीद
ईरान को इस बार रूस का खुला समर्थन मिल गया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बयान दिया है कि यदि ज़रूरत पड़ी तो रूस ईरान को हर संभव मदद देगा। इस समर्थन से ईरान के हौसले और बुलंद हो गए हैं। दूसरी ओर, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिका पहुंच चुके हैं। उनके साथ रक्षा मंत्री और आईडीएफ चीफ भी हैं। अमेरिका में नेतन्याहू की ट्रंप समर्थक नेताओं से महत्वपूर्ण बैठकें हो रही हैं। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री भी जिनेवा में यूरोपीय नेताओं से कूटनीतिक बातचीत में जुटे हैं।
खोर्रमशहर मिसाइल: ईरान की गेमचेंजर ताकत
इस संघर्ष में ईरान की खोर्रमशहर मिसाइल ने इजरायल की चिंता कई गुना बढ़ा दी है। यह मीडियम रेंज बैलेस्टिक मिसाइल (MRBM) 2000 किलोमीटर की दूरी तक मार करने में सक्षम है। इसका मतलब है कि पूरे इजरायल पर यह मिसाइल कहीं से भी हमला कर सकती है, चाहे वह ईरान हो या लेबनान, सीरिया अथवा यमन। इस मिसाइल में 1500 से 1800 किलोग्राम तक पारंपरिक या परमाणु वारहेड ले जाने की क्षमता है।
मैक 12 की रफ्तार और क्लस्टर बम का प्रयोग
खोर्रमशहर मिसाइल की गति मैक 12 है, जो आवाज की गति से 12 गुना तेज है। इस मिसाइल के जरिए ईरान ने इस बार पहली बार क्लस्टर बम का भी इस्तेमाल किया है। आईडीएफ ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि रिहायशी इलाकों में ऐसे बम दागे गए जो हवा में फटकर छोटे-छोटे बमों के रूप में फैल जाते हैं और बड़े पैमाने पर तबाही मचाते हैं। यह हथियार सामान्य बमों की तुलना में कहीं अधिक विध्वंसक माना जाता है।
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