देशभर में करोड़ों लोग किराए के घरों में रहते हैं। अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या लंबे समय तक किराए पर रहने वाला व्यक्ति उस घर पर मालिकाना हक का दावा कर सकता है। मकानमालिकों को यह आशंका परेशान करती रहती है, लेकिन कानून इस पर स्पष्ट दिशा देता है। आम तौर पर किराएदार को सिर्फ घर में रहने का अधिकार मिलता है, जबकि संपत्ति का मालिकाना हक तभी बनता है जब घर कानूनी रूप से खरीदा जाए और रजिस्ट्री पूरी हो।
क्या है एडवर्स पजेशन का नियम
कुछ विशेष परिस्थितियों में एडवर्स पजेशन (Adverse Possession) का सिद्धांत लागू हो सकता है। यह नियम तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति किसी संपत्ति पर लंबे समय तक खुले, निरंतर और बिना रोक-टोक कब्जे में रहा हो। यह हर किराएदार पर लागू नहीं होता, बल्कि केवल उन परिस्थितियों में लागू होता है जब मालिक ने लंबे समय तक संपत्ति पर ध्यान नहीं दिया हो और कब्जा उसकी जानकारी के बावजूद जारी रहा हो।
12 साल की लगातार कब्जेदारी जरूरी
एडवर्स पजेशन के तहत दावा तभी मजबूत माना जाता है जब व्यक्ति कम से कम 12 साल तक लगातार कब्जे में रहा हो। इस अवधि में उसे घर पर ऐसा नियंत्रण रखना चाहिए जैसे वह असली मालिक हो। साथ ही, इस दौरान मकान मालिक की ओर से किसी भी तरह की दखलअंदाज़ी या आपत्ति दर्ज नहीं होनी चाहिए।
कब किराएदार दावा कर सकता है मालिकाना हक
किराएदार तब ही एडवर्स पजेशन का दावा कर सकता है जब —
- रेंट एग्रीमेंट खत्म हो चुका हो,
- या फिर मकान मालिक ने अपनी शर्तें पूरी न की हों,
- और कब्जा मालिक की अनुमति के बिना जारी रहा हो।
किराएदार को यह साबित करना होता है कि वह घर को लंबे समय से अपनी निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल कर रहा है और मालिक कई वर्षों से संपत्ति पर आया ही नहीं।
कब किराएदार दावा नहीं कर सकता
कुछ परिस्थितियों में किराएदार किसी भी हाल में मालिकाना हक का दावा नहीं कर सकता, जैसे—
- मकान मालिक सेना में कार्यरत हो,
- मालिक नाबालिग हो,
- या मानसिक रूप से अस्वस्थ हो।
इन स्थितियों में कानून मालिक के हितों की विशेष सुरक्षा करता है और कब्जे को वैध दावा नहीं मानता।
सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में किराएदार और मकान मालिक के अधिकारों के संतुलन के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया था। कोर्ट ने कहा कि यदि किराएदार मार्केट रेट पर किराया देने और हर तीन साल में 10% बढ़ोतरी स्वीकार करता है, तो उसे कम से कम 5 साल तक शांतिपूर्ण ढंग से रहने का अधिकार मिलता है।
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