अमेरिकी नौसेना का सबसे शक्तिशाली युद्ध बेड़ा USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप अब दक्षिण चीन सागर छोड़कर मिडिल ईस्ट की ओर तेजी से बढ़ रहा है। पेंटागन ने ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए इस सुपर पावरफुल स्ट्राइक ग्रुप को रीडायरेक्ट किया है। सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक, अकेला यह बेड़ा पूरी सेना जितनी मारक क्षमता रखता है।
क्या है USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप?
यह कैरियर स्ट्राइक ग्रुप-3 है, जिसका मुख्य जहाज USS अब्राहम लिंकन (CVN-72) है। यह निमित्ज़ क्लास का न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर है, जो बिना ईंधन भरे कई सालों तक समुद्र में ऑपरेशन कर सकता है।
इस ग्रुप में शामिल हैं ये घातक हथियार
इस युद्ध समूह में 3 से 4 आर्लिघ बर्क क्लास गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर, 1–2 न्यूक्लियर अटैक सबमरीन, और फ्यूल व हथियार सपोर्ट शिप्स शामिल हैं। पूरे बेड़े में करीब 7 से 8 हजार सैनिक और मरीन तैनात रहते हैं।
आसमान से तबाही: कौन-कौन से विमान तैनात?
कैरियर एयर विंग-9 (CVW-9) में 65–70 अत्याधुनिक विमान हैं। इनमें
- F/A-18 सुपर हॉर्नेट
- F-35C स्टील्थ फाइटर जेट
- E-2D हॉकआई (AWACS)
- EA-18G ग्राउलर (रडार जामिंग)
- MH-60 सीहॉक हेलीकॉप्टर शामिल हैं।
यह ग्रुप 24 घंटे में 150 से ज्यादा उड़ानें भरने में सक्षम है।
मिसाइल पावर: 1000 किमी दूर तक हमला
इस बेड़े के पास सैकड़ों टोमाहॉक क्रूज़ मिसाइलें हैं, जो दुश्मन के एयरबेस, न्यूक्लियर साइट्स और ऑयल फैसिलिटी को तबाह कर सकती हैं। साथ ही SM-6, ESSM, RAM और Phalanx CIWS जैसी मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी मौजूद हैं।
ईरान की ओर क्यों बढ़ रहा है अमेरिकी बेड़ा?
ईरान-अमेरिका तनाव, इजरायल सुरक्षा और होर्मुज स्ट्रेट की निगरानी के लिए अमेरिका ने यह कदम उठाया है। संदेश साफ है—अमेरिका युद्ध रोकना भी जानता है और जरूरत पड़ी तो जवाब देना भी।
भारत पर क्या असर?
ईरान में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। भारत सरकार हालात पर करीबी नजर बनाए हुए है।
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