मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका और इजरायल ईरान में स्पेशल फोर्स भेजने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। इस संभावित ऑपरेशन का उद्देश्य ईरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के भंडार को सुरक्षित करना बताया जा रहा है।
Axios की रिपोर्ट के अनुसार, चार सूत्रों ने बताया है कि यह कदम युद्ध के अगले चरण में उठाया जा सकता है। बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी सख्त चेतावनी जारी की है।
अमेरिकी रक्षा सचिव की चेतावनी
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया के जरिए कड़ा संदेश देते हुए कहा कि यदि किसी ने अमेरिकी नागरिकों को नुकसान पहुंचाया या उन्हें धमकी दी, तो अमेरिका उसे कहीं भी ढूंढकर जवाब देगा।
यह बयान United States Central Command (CENTCOM) के आधिकारिक अकाउंट के माध्यम से साझा किया गया। इसके साथ ही अमेरिकी सेना की तैयारियों को दिखाने वाला एक छोटा वीडियो भी जारी किया गया।
21 सेकंड का वीडियो जारी
CENTCOM की ओर से जारी 21 सेकंड के वीडियो में हालिया सैन्य अभियानों की झलक दिखाई गई। वीडियो में अमेरिकी सेना को सैन्य वाहनों और इमारतों को निशाना बनाते हुए दिखाया गया है।
इस वीडियो का उद्देश्य यह संदेश देना बताया गया कि अमेरिकी सेना किसी भी खतरे का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
ट्रंप का दावा – ईरान को बड़ा नुकसान
इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है। उनके अनुसार अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में ईरान के शीर्ष नेतृत्व को खत्म कर दिया गया है और इससे दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा कम हुआ है।
ट्रंप का कहना है कि इस अभियान में ईरान की सैन्य ताकत को भारी नुकसान हुआ है। उनके मुताबिक:
- ईरान की नौसेना को लगभग पूरी तरह नष्ट कर दिया गया
- करीब 44 जहाज तबाह किए गए
- कई लड़ाकू विमान और मिसाइल सिस्टम नष्ट किए गए
- मिसाइल निर्माण से जुड़े कई कारखानों पर हमले किए गए
उन्होंने कहा कि इन हमलों के बाद ईरान की सैन्य क्षमता काफी कमजोर पड़ गई है।
स्कूल पर हमले के आरोपों पर क्या बोले ट्रंप?
युद्ध के बीच एक घटना को लेकर विवाद भी सामने आया है। रिपोर्टों में कहा गया कि ईरान में एक लड़कियों के स्कूल पर बम गिरा, जिसमें नुकसान हुआ।
इस मामले पर ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस घटना के लिए जिम्मेदार नहीं है। उनके मुताबिक यह संभव है कि ईरान के किसी हथियार की तकनीकी खराबी या गलत दिशा में जाने के कारण यह हादसा हुआ हो।
युद्ध कितने समय तक चलेगा?
युद्ध की अवधि को लेकर ट्रंप ने कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं दी। उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई तब तक जारी रह सकती है जब तक इसकी जरूरत महसूस होगी।
हालांकि अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने संकेत दिया कि कूटनीतिक समाधान की संभावना अभी खत्म नहीं हुई है। लेकिन उनके अनुसार पहले हुई बातचीत में ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते के लिए तैयार नहीं था।
यूरेनियम संवर्धन पर ईरान का रुख
ईरान पहले ही कह चुका है कि उसे यूरेनियम इनरिचमेंट करने का अधिकार है। रिपोर्टों के मुताबिक ईरान के पास लगभग 60 प्रतिशत तक समृद्ध यूरेनियम मौजूद है, जो सैद्धांतिक रूप से कई परमाणु हथियार बनाने के लिए पर्याप्त माना जाता है। यही वजह है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की चिंता बढ़ती जा रही है।
28 फरवरी से तेज हुआ संकट
पूरे क्षेत्र में तनाव उस समय तेजी से बढ़ गया जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया। इस ऑपरेशन के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौत की खबरें सामने आईं।
इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कई जगहों पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमले किए। इन हमलों में बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी ठिकानों का भी जिक्र किया गया।
तेहरान में इजरायली हमले
इजरायल रक्षा बल ने भी जानकारी दी कि इजरायली वायु सेना ने तेहरान में कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। सेना के अनुसार इन हमलों में उन ईंधन भंडारण केंद्रों को निशाना बनाया गया जो ईरानी सैन्य इकाइयों को सप्लाई करते थे।इजरायली सेना का दावा है कि इन हमलों से ईरान की सैन्य व्यवस्था को बड़ा झटका लगा है।
पूरे पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव
लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाई के चलते पूरे पश्चिम एशिया में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। इससे न केवल क्षेत्र के आम नागरिक बल्कि वहां मौजूद विदेशी नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
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