मई महीने की शुरुआत में उत्तर प्रदेश सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गंगा एक्सप्रेसवे पर करीब 15 दिनों तक टोल वसूली नहीं की जाएगी। यानी मई के दूसरे सप्ताह तक इस हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे पर यात्रा पूरी तरह मुफ्त रहेगी।
29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरठ से प्रयागराज को जोड़ने वाले इस महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया था। इसके तुरंत बाद सरकार ने यह फैसला लागू किया।
यूपीईआईडीए ने जारी किया आदेश
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) ने टोल वसूली को अस्थायी रूप से रोकने के लिए औपचारिक आदेश जारी किया। यह आदेश रियायतकर्ता कंपनियों—आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर और अदानी इंफ्रास्ट्रक्चर—को दिया गया है।
देश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे
गंगा एक्सप्रेसवे को देश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे माना जा रहा है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 594 किलोमीटर है। यह मेरठ को प्रयागराज से सीधे जोड़ता है, जिससे यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है। हालांकि, 15 दिनों की इस छूट के बाद एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली फिर से शुरू कर दी जाएगी।
टोल दरें: कितना खर्च आएगा सफर में?
टोल-फ्री अवधि खत्म होने के बाद यात्रियों को निम्नानुसार शुल्क देना पड़ सकता है:
- कार/जीप: मेरठ से प्रयागराज तक लगभग ₹1800
- बस/ट्रक: ₹5700 से अधिक
- भारी बहु-धुरी वाहन: करीब ₹9000
- बड़े ट्रक: ₹11000 से ज्यादा प्रति यात्रा
टोल शुल्क एक्सप्रेसवे के अलग-अलग खंडों के आधार पर तय किया गया है।
चार हिस्सों में बंटा है एक्सप्रेसवे
गंगा एक्सप्रेसवे को संचालन के लिहाज से चार प्रमुख सेक्शन में बांटा गया है:
- मेरठ से बदायूं
- बदायूं से हरदोई
- हरदोई से उन्नाव
- उन्नाव से प्रयागराज
हर खंड पर अलग-अलग टोल दरें लागू होंगी।
सरकार का मकसद: ज्यादा से ज्यादा उपयोग
एक्सप्रेसवे को शुरुआती दिनों में टोल-फ्री रखने के पीछे सरकार की खास रणनीति है। इससे ज्यादा लोग इस मार्ग का उपयोग करेंगे और हाई-स्पीड यात्रा का अनुभव ले सकेंगे। साथ ही, इस दौरान एक्सप्रेसवे की छोटी-मोटी तकनीकी या संचालन संबंधी कमियों की पहचान भी की जा सकेगी।
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