अमेरिका और ईरान के बीच संभावित युद्धविराम और शांति समझौते की खबरों के बाद वैश्विक तेल बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिली है। होर्मुज स्ट्रेट से तेल सप्लाई दोबारा सामान्य होने की उम्मीद के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमत 83 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है। वहीं अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी करीब 81 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट खुलने से बाजार में बढ़ी उम्मीद
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौता अगले शुक्रवार 19 जून को स्विटजरलैंड में साइन हो सकता है। इसके साथ ही होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही फिर शुरू होने लगी है। इस घटनाक्रम के बाद वैश्विक ऊर्जा सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता कम होती दिखाई दे रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच तनाव पूरी तरह कम होता है, तो तेल और गैस की सप्लाई सामान्य होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बनेगा।
गोल्डमैन सैक्स ने घटाया क्रूड ऑयल का अनुमान
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स ने भी कच्चे तेल को लेकर अपने अनुमान में कटौती की है। कंपनी ने 2026 की चौथी तिमाही के लिए ब्रेंट क्रूड का अनुमान 90 डॉलर प्रति बैरल से घटाकर 80 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है।
इसके अलावा, 2027 के लिए औसत कीमत का अनुमान भी 80 डॉलर से घटाकर 75 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है। कंपनी का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से तेल बाजार में स्थिरता लौट सकती है।
मॉर्गन स्टेनली ने भी कम किया अनुमान
मॉर्गन स्टेनली ने भी अपनी ताजा रिपोर्ट में ब्रेंट क्रूड के अनुमान को कम किया है। ब्रोकरेज फर्म ने चौथी तिमाही (Q4) के लिए अपना अनुमान 95 डॉलर से घटाकर सीधे 80 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है।
वहीं तीसरी तिमाही (Q3) के लिए भी अनुमान में कटौती करते हुए इसे 100 डॉलर से घटाकर 90 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध और सप्लाई संकट की आशंका कम होने से तेल बाजार में राहत देखने को मिल सकती है।
भारत के लिए क्यों अहम है कच्चे तेल में गिरावट?
भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कम होने से भारत को बड़ा आर्थिक फायदा मिल सकता है।
कच्चा तेल सस्ता होने पर देश का आयात बिल घटेगा, विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा और रुपये को भी मजबूती मिल सकती है। इसके अलावा महंगाई नियंत्रित रखने में भी मदद मिलेगी।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है असर
पिछले कुछ समय में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर देश में पेट्रोल और डीजल के दामों पर भी देखने को मिला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईंधन की कीमतों में करीब 7.50 रुपये तक की बढ़ोतरी हो चुकी है।
इसके कारण ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ी, जिससे कई जरूरी सामान महंगे हुए हैं। अब यदि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट आती है, तो आने वाले समय में आम लोगों को राहत मिल सकती है।
वैश्विक बाजार की नजर शांति समझौते पर
फिलहाल दुनियाभर के निवेशकों और ऊर्जा बाजार की नजर अमेरिका-ईरान समझौते पर टिकी हुई है। यदि यह समझौता तय समय पर लागू होता है, तो वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता लौटने की संभावना और मजबूत हो सकती है।
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