खबर संसार, नई दिल्ली : वसीयत (bequest) करने से पहले तो इन बातों का जरूर रखें ध्यान, वसीयत शब्द जुबान पर आते ही मृत्यु का खयाल आता है। लेकिन वसीयत सच्चाई है क्योंकि इसके बिना उत्तराधिकारी या वारिस को प्रॉपर्टी लेने में दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती हैं।
वसीयत (bequest) एक कानूनी दस्तावेज है जिसमें यह बताया जाता है कि अपना धन या अपनी संपत्ति मृत्यु के बाद किसे मिलेगी. यानी कि प्रॉपर्टी का उत्तराधिकारी या वारिस कौन होगा।
कौन बना सकता है वसीयत (bequest)
अगर कोई भी व्यक्ति जिसकी उम्र 21 साल से ज्यादा हो, वह वसीयत (bequest) लिख सकता है। किसी अच्छे वकील की सहायता से ही वसीयत लिखी, जाए ताकि कोई खामी या त्रुटी न रह जाए। वसीयत को टाइप करके या हाथ से लिख सकते हैं। ऑनलाइन भी वसीयत बना सकते है, लेकिन उसकी एक कॉपी रखना जरूरी है जिस पर हस्ताक्षर हो।
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इन बातों का विशेष रखें ध्यान
- नाम, पता, उम्र और वसीयत लिखने के समय का जिक्र हो। इसमें बताएं कि किसी के दबाव में वसीयत नहीं लिख रहे बल्कि परिवार की भलाई में यह काम कर रहे हैं।
- वसीयत लिखते समय प्रॉपर्टी की पूरी जानकारी देना चाहिए स्टॉक, बॉन्ड्स, म्यूचुअल फंड, बैंक अकाउंट और कैश की जानकारी दें।
- जूलरी, आर्टिफैक्ट्स के साथ अचल संपत्ति के बारे में विस्तार से बताएं. वसीयत से जुड़े जो भी कागजात हैं उन्हें बैंक लॉकर जैसे सुरक्षित स्थान पर रखें और इसकी जानकारी दें।
- जब प्रॉपर्टी की जानकारी दे दें तो वारिस के बारे में बताएं कि किसे कितना परसेंट हिस्सा देना है. वारिस का पूरा नाम लिखना चाहिए ताकि बाद में कोई कानूनी अड़चन न आए। आधार या पासपोर्ट में जो नाम हो, वारिस के उसी नाम का जिक्र करें. वारिस अगर नाबालिग है तो उसके साथ किसी और को सह उत्तराधिकारी बनाएं।
- वसीयत पर दो गवाहों के दस्तखत होने चाहिए जो कि हर पेज पर होने चाहिए. हस्ताक्षर के साथ तारीख और स्थान का भी जिक्र होना चाहिए।
- सादे कागज पर हस्ताक्षर के साथ भी वसीयत मान्य होता है, लेकिन इसे और मजबूत बनाने के लिए लोकल सब रजिस्ट्रार के ऑफिस से रजिस्टर करा लें।
- वसीयत में कभी भी बदलाव संभव है लेकिन अंत में जो बदलाव होगा, वही मान्य होगा।


