खबर संसार, नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने दी Char Dham प्रोजेक्ट को हरी झंडी, जी हां सड़कों को डबल लाइन बनाने में आ रही अड़चनों को दूर कर दी गई है। और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने भी अनुमति दे दी है। बताते चलें कि 12,000 करोड़ रुपये की रणनीतिक 900 किलोमीटर लंबी चारधाम परियोजना का उद्देश्य उत्तराखंड के चार पवित्र धाम यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ को हर मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करना है।
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आज मंगलवार 14 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा कारणों के चलते Char Dham परियोजना के लिए सड़कों को श् डबल लेन श् तक चैड़ा करने की इजाजत दे दी है। जिसके चलते इस चारधाम परियोजना से हर मौसम में भारत की चीन सीमा तक पहुंच भी आसानी से हो जाएगी। न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने परियोजना पर सीधे रिपोर्ट करने के लिए पूर्व न्यायमूर्ति एके सीकरी की अध्यक्षता में एक निरीक्षण समिति का गठन किया गया। निगरानी समिति को रक्षा मंत्रालय, सड़क परिवहन मंत्रालय, उत्तराखंड सरकार और सभी जिलाधिकारियों का पूरा सहयोग मिलेगा।
साल 2018 में एक गैर सरकारी संस्था ने सड़क चैड़ीकरण की इस परियोजना को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उस एनजीओ ने दलील दी थी कि सड़क चैड़ीकरण के नाम पेड़ काटे जाएंगे। इससे पहाड़ों में विस्फोट का अंदेशा है, इसके साथ साथ हिमालय की सूरते हाल की भी मजीद खरब होगी। इससे भूस्खलन, बाढ़ का खतरा बढ़ जाएगा और जंगल व जलीय जीवों को नुकसान पहुंचेगा।
क्या है Char Dham परियोजना
Char Dham परियोजना के तहत उत्तराखंड के चार प्रमुख तीर्थों यमुनोत्री, गंगोत्री, बद्रीनाथ और केदारनाथ को सड़क मार्ग से जोड़ा जाएगा। इस परियोजना की शुरुआत साल 2016 में सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने की थी। इसके तहत दो सुरंगें, 15 पुल, 25 बड़े पुल, 18 यात्री सेवा केंद्र और 13 बायपास आदि बनाए जाने हैं। ऋषिकेश से माना तक, ऋषिकेश से गंगोत्री तक और टनकपुर से पिथौरागढ़ तक राष्ट्रीय राजमार्गों को टू-लेन किया जा सकता है
