चीन ने विंटर ओलिंपिक के पहले सख्ती को और ज्यादा बढ़ा दिया है। बीजिंग समेत देश के कई बड़े शहरों में लोगों की व्यापर जांच की जा रही है। बिना मास्क के बाहर निकलने वाले व्यक्तियों को जेल तक भेजा जा रहा है। कोरोना वायरस के प्रकोप को रोकने के लिए चीन ‘जीरो कोविड पॉलिसी’ पर जोर दे रहा है।
इसके लिए चीनी सरकार सभी हदें पार करने के लिए भी तैयार है। फिर चाहें लोगों को घरों को कैद करना हो या स्टील के बक्से में। चीनी सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है कि शिआन में कोरोना का प्रकोप 5 जनवरी के बाद से अब काबू में है। हालांकि सरकार की ओर से नियमों को और ज्यादा कड़ा कर दिया गया है और लोग अभी भी अपने घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।
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खाना बचाने के लिए जल्दी सोना पड़ता है
उन्होंने बताया कि बीते तीन दिनों में वह और उनके पति सिर्फ थोड़ा-सा खाना ही खरीद पाए हैं और उन्हें नहीं पता कि अब कब कुछ और खरीद पाएंगे। काई ने कहा कि मुझे चिंता है कि हमारे पास जल्द ही खाने के लिए कुछ नहीं होगा। हम अपना पेट नहीं भर सकते। हम हर रोज खाने के बाद शाम को 3 से 4 बजे तक सो जाते हैं। हम खाना बचाने के लिए ज्यादा से ज्यादा सोते हैं। उन्होंने बताया कि परिवार के पास खाने के लिए सिर्फ एक कटोरी चावल, करीब पांच किग्रा आटा, सात कप नूडल्स और थोड़ा-सा मीट बचा हुआ है।
क्वारंटीन शिविरों में रखे गए बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं
ओमीक्रोन के दो मामले सामने आने के बाद चीन ने सोमवार देर रात 55 लाख लोगों के शहर आन्यांग में लॉकडाउन लगा दिया था। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, चीन हजारों की संख्या में लोगों को शियान शहर के बाहरी इलाकों में बने क्वारंटीन शिविरों में कैद कर रहा है। इन शिविरों में कैद रहे लोगों ने रिपोर्ट में बताया है कि वहां गर्भवती महिलाओं, बुजुर्ग और बच्चों को भी रखा गया है। उन लोगों ने जीरो कोविड राज्य में डिटेंशन कैंपों की भयावहता को भी बताया है।
बक्से में बंद किए जा रहे लोग
ऑनलाइन शेयर किए जा रहे एक वीडियो में लोगों को लकड़ी के बिस्तर और शौचालय से सुसज्जित छोटे बक्से में दिखाया गया है। इस जगह पर उन्हें दो हफ्तों तक रहने के लिए मजबूर किया जाता है। इन शिविरों में कैद लोगों को पीपीई किट पहने कुछ लोग खाना देते नजर आ रहे हैं। जिन लोगों को इन क्वारंटीन कैंप्स में कैद किया गया था, उन लोगों ने बताया है कि उन्हें बहुत कम खाना दिया जाता था।
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