अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा बातचीत दोबारा शुरू करने के संकेतों के बीच ईरान ने अपनी शर्तों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान ने साफ कर दिया है कि मौजूदा हालात में किसी समझौते की संभावना बेहद कम है।
ईरान ने सार्वजनिक रूप से अमेरिका के साथ चल रही वार्ताओं के दावों को भी खारिज किया है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और गहराता नजर आ रहा है।
खाड़ी से अमेरिकी सैन्य ठिकाने हटाने की मांग
ईरानी प्रतिनिधियों ने बातचीत की किसी भी प्रक्रिया के लिए कुछ अहम शर्तें रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से खाड़ी क्षेत्र से सभी अमेरिकी सैन्य अड्डों को हटाने की मांग शामिल है।
इसके अलावा, युद्ध के दौरान हुए नुकसान की भरपाई और इज़राइल द्वारा हिज़्बुल्लाह के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को खत्म करने की भी शर्त रखी गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना मुख्य मुद्दा
इस पूरे विवाद के केंद्र में होर्मुज जलडमरूमध्य है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है। ईरान चाहता है कि उसे इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क वसूलने का अधिकार मिले। साथ ही, एक नई व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है, जिससे इस रणनीतिक क्षेत्र पर उसका प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो सके।
परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर नरमी के संकेत
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान बातचीत के तहत अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को पांच साल तक रोकने और यूरेनियम संवर्धन स्तर को कम करने पर विचार कर सकता है।
इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को अपने सेंट्रीफ्यूज की निगरानी की अनुमति देने और 60% संवर्धित यूरेनियम भंडार पर चर्चा शुरू करने के संकेत भी मिले हैं।
क्षेत्रीय संगठनों को फंडिंग रोकने पर भी विचार
संभावित व्यापक समझौते के तहत ईरान हिज़्बुल्लाह, हमास और इराकी मिलिशिया जैसे क्षेत्रीय समूहों को फंडिंग बंद करने पर भी सहमत हो सकता है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर ईरान का रुख अभी भी सख्त बना हुआ है, लेकिन इन संकेतों को बातचीत की दिशा में शुरुआती कदम माना जा रहा है।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच वार्ता की संभावनाएं अभी भी अनिश्चित बनी हुई हैं। ईरान की कड़ी शर्तें इस बात का संकेत देती हैं कि किसी भी समझौते तक पहुंचना आसान नहीं होगा।
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