ईरान के साथ जारी युद्ध में इजरायल की वायु सुरक्षा प्रणाली गंभीर दबाव में है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल के पास अब लंबी दूरी की मिसाइलों को रोकने वाले इंटरसेप्टर्स की संख्या तेजी से घट रही है। यदि ईरान मौजूदा गति से मिसाइल हमले करता रहा, तो इजरायल के पास महज 10 से 12 दिनों तक की इंटरसेप्टिंग क्षमता बचेगी।
अब हर मिसाइल को रोकना नहीं होगा संभव
एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अगर ईरान हमले तेज करता है, तो इजरायल को यह निर्णय लेना पड़ेगा कि कौन-सी मिसाइल को इंटरसेप्ट किया जाए और किसे नहीं। अब तक इजरायल ने ऑपरेशन राइजिंग लायन के जवाब में कई मिसाइलें नष्ट की हैं, लेकिन हर हमले को रोकना संभव नहीं है।
अब तक 400 बैलिस्टिक मिसाइलें दाग चुका है ईरान
13 जून से शुरू हुए ऑपरेशन के बाद से ईरान लगभग 400 बैलिस्टिक मिसाइलें दाग चुका है, जो उसके 1,000 मिसाइलों के स्टॉक का हिस्सा है। कई मिसाइलें भूमिगत ठिकानों से दागी गई हैं, जिससे उन्हें ट्रैक करना और मुश्किल हो गया है।
इजरायल का बहुस्तरीय डिफेंस सिस्टम भी दबाव में
आयरन डोम, डेविड स्लिंग, एरो सिस्टम, पैट्रियट और THAAD जैसे बहुस्तरीय डिफेंस सिस्टम अब भारी खर्च और सीमित स्टॉक से जूझ रहे हैं। एक इंटरसेप्टर मिसाइल की कीमत 30 लाख डॉलर तक होती है, और WSJ की रिपोर्ट के मुताबिक, एक रात की सुरक्षा लागत 1 बिलियन शेकेल यानी लगभग 285 मिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है।
अमेरिकी समर्थन के बिना मुश्किल होगा डिफेंस बनाए रखना
सूत्रों के अनुसार, अगर अमेरिका ने जल्दी सप्लाई या सीधे हस्तक्षेप नहीं किया, तो इजरायल की डिफेंस क्षमता महज 12 दिन में खत्म हो सकती है। मौजूदा हालात में इजरायली सिस्टम पहले ही तनाव में है और जल्द ही उसे चुनना पड़ सकता है कि किन मिसाइलों को रोका जाए।
इसे भी पढ़े- पवन खेड़ा की कोर्ट में होगी पेशी, ट्रांजिट रिमांड पर असम ले जाएगी पुलिस
