Monday, February 26, 2024
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जानें चन्‍द्रयान-3 के विक्रम लैंडर व रोवर प्रज्ञान के जागने की कितनी बची उम्मीद

चन्‍द्रयान-3 के विक्रम लैंडर व रोवर प्रज्ञान के जागने की कितनी बची उम्मीद जी, हां इसरो के पूर्व साइंटिस्ट तपन मिश्रा ने कहा की साइंटिस्ट वैसे तो चमत्कार में यकीन नहीं करते फिर भी हम सभी इंजीनियरिंग वाले प्रयास जरूर करते हैं। कभी-कभी फेल होते हैं और ज्यादातर समय सफल रहते हैं। मैं कामना करता हूं कि इस बार भी इसरो के साइंटिस्ट सफल हों…

उन्‍होंने आगे कि वैसे तो इसरो का मूल प्लान यह नहीं था लेकिन अगर वे दोनों- विक्रम लैंडर और रोवर प्रज्ञान- रात बीतने के बाद अब रिवाइव करते हैं तो ISRO अपने कमिटमेंट्स से काफी आगे निकल जाएगा। जी हां, वह ऐतिहासिक पल साइंटिस्टों के लिए बड़ा दिन साबित होगा।

तपन ने साफ कहा कि विक्रम लैंडर और प्रज्ञान को मुख्य रूप से केवल 14 दिन के लिए तैयार किया गया था। अगर वे चांद की एक रात के बाद जाग जाते हैं तो वे कई रातें और काट लेंगे और हो सकता है कि वे 6 महीने से लेकर एक साल तक चांद पर अपना काम करते रहें।

धुंधली क्यों हो रही उम्मीद?

इसरो के पूर्व चेयरमैन एएस किरन कुमार ने एक इंटरव्यू में हाल में अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 मिशन के लैंडर और रोवर की बैटरियां -200 और -250 डिग्री सेल्सियस के तापमान में जिंदा रहने के लिए नहीं बनी हैं।

ऐसे में सूरज निकलने पर उनके फिर से काम करने को लेकर पूरी तरह अनिश्चितता की स्थिति है। हालांकि इसरो ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। 22 सितंबर से लगातार चांद तक सिग्नल भेजा जा रहा है और साइंटिस्ट पूरे 14 दिन तक इंतजार करेंगे जब तक चांद पर अगली रात शुरू नहीं हो जाती।

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