नई दिल्ली: दिल्ली का रामलीला मैदान एक बार फिर सियासी गतिविधियों का बड़ा केंद्र बना हुआ है। विपक्षी दलों की महारैली के चलते इस मैदान की बुकिंग और किराये को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर जिस मैदान में हजारों लोग जुटते हैं, वहां रैली आयोजित करने के लिए कितना पैसा खर्च करना पड़ता है? क्या राजनीतिक दलों को भी सामान्य बुकिंग शुल्क देना होता है या विरोध-प्रदर्शन के लिए अलग नियम हैं?
सामान्य बुकिंग के लिए कितना देना होता है पैसा?
रामलीला मैदान की सामान्य बुकिंग का किराया करीब 50 हजार रुपये प्रतिदिन बताया जाता है। इसके अलावा 55 हजार रुपये की सिक्योरिटी राशि भी जमा करनी होती है। जीएसटी और अन्य शुल्क जोड़ने पर शुरुआती भुगतान करीब 1.21 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। हालांकि, सिक्योरिटी डिपॉजिट नियमों और शर्तों के अनुसार वापस किया जा सकता है।
राजनीतिक रैली के लिए क्या हैं नियम?
रामलीला मैदान में राजनीतिक रैली या विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने के लिए अलग व्यवस्था भी है। एमसीडी की संशोधित व्यवस्था के तहत विरोध-प्रदर्शन के लिए सामान्य किराये में छूट का प्रावधान है। इसके लिए आयोजकों को करीब 5 हजार रुपये की रिफंडेबल सिक्योरिटी जमा करनी पड़ सकती है। इसके साथ ही दिल्ली पुलिस से एनओसी लेना भी जरूरी होता है।
कितने लोगों के जुटने की है क्षमता?
रामलीला मैदान करीब 12 एकड़ में फैला हुआ है। यहां बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों और जनसभाओं का आयोजन किया जाता रहा है। इसकी क्षमता लगभग 50 हजार लोगों तक बताई जाती है। यही वजह है कि राजनीतिक दलों के लिए यह मैदान बड़ी रैलियों के आयोजन का प्रमुख स्थान बना हुआ है।
बुकिंग से पहले जान लें जरूरी बात
मैदान की बुकिंग का वास्तविक खर्च कार्यक्रम के प्रकार, इस्तेमाल किए जाने वाले क्षेत्र, अवधि और संबंधित अनुमतियों पर निर्भर करता है। इसलिए सामान्य बुकिंग शुल्क और राजनीतिक प्रदर्शन के लिए लागू शुल्क को एक जैसा नहीं माना जा सकता।
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