पाकिस्तान को देश बने उतना ही समय हुआ है, जितना भारत को आजाद हुए। इतने वर्षों में भारत (India) कितना आगे निकल चुका है, लेकिन पाकिस्तान काफी पीछे रह गया है। इसके पीछे राजनीतिक अस्थिरता एक बड़ा कारण रही है। 1947 से अब तक पाकिस्तान में 26 प्रधानमंत्री हुए हैं। इनमें से 7 को कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनाया गया है। 26 में से अगर इन सात केयरटेकर प्रधानमंत्री को छोड़ दें तो कुल 19 प्रधानमंत्री हुए हैं। लेकिन इनमें से किसी ने भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया है।
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कार्यकाल पूरा नहीं कर पाने की कई वजहें?
पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान से लेकर इमरान खान तक सभी प्रधानमंत्रियों में यही एक चीज कॉमन है कि इनमं9 से कोई भी पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। पाया है। नवाज शरीफ 4 बार और बेनजीर भुट्टो 2 बार प्रधानमंत्री बनीं लेकिन ये दिग्गज भी एक बार में 5 साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके।
- लियाकत अली खान: 15 अगस्त 1947 को मुस्लिम लीग के नेता लियाकत अली पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री बने। उन्हें गवर्नर जनरल ने पीएम नियुक्त किया था। साल 1951 में लियाकत अली खान की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
- ख्वाजा नाजीमुद्दीन: लियाकत की हत्या के बाद मुस्लिम लीग के ही नेता ख्वाजा नाजीमुद्दीन पीएम बने। वे 17 अक्टूबर 1951 को पीएम बने पर दो साल भी पूरे नहीं कर पाए। 17 अप्रैल 1953 को गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मुहम्मद ने उन्हें पद से हटा दिया।
- मुहम्मद अली बोगरा: 1954 में तत्कालीन गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मुहम्मद ने सरकार को बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद चुनाव में मुस्लिम लीग हार गई, लेकिन गठबंधन की सरकार में 17 अप्रैल 1955 को मुहम्मद अली बोगरा प्रधानमंत्री बन गए। हालांकि बहुमत के अभाव में सरकार चल नहीं सकी और 4 महीने से भी कम वक्त में पाक सरकार को बर्खास्त कर दिया गया।
- चौधरी मौहम्मद अली: मुहम्मद अली बोगरा के बाद प्रधानमंत्री बने चौधरी मौहम्मद अली। 12 अगस्त 1955 को उन्होंने पीएम पद की शपथ ली और 1 साल 1 महीने तक कुर्सी पर रहने के बाद उन्हें भी प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा। 12 सितंबर 1956 के बाद वे प्रधानमंत्री नहीं रह पाए।
- हुसैन शहीद सुहरावर्दी: चौधरी मौहम्मद अली के बाद हुसैन शहीद सुहरावर्दी पीएम बने। वे 12 सितंबर 1956 से लेकर 17 अक्टूबर 1957 तक पीएम रहे। इस तरह उनका कार्यकाल भी महज 1 साल 1 महीने ही रहा।
- इब्राहिम इस्माइल चुंदरीगर: हुसैन शहीद सुहरावर्दी के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति इस्कंदर अली मिर्जा ने चुंदरीगर को पीएम पद के लिए चुना। 17 अक्टूबर 1957 को वह प्रधानमंत्री बने, लेकिन महज दो महीने तक ही वे इस पद पर रहे और 16 दिसंबर 1957 को उन्होंने पद से इस्ती फा दे दिया।
- फिरोज खान नून और नूरुल अमीन: चुंदरीगर के बाद 16 दिसंबर 1957 से 7 अक्टूबर 1958 तक कुल 9 महीने 21 दिन के लिए फिरोज खान नून पाकिस्तान के पीएम बने। नूरुल अमीन का रिकॉर्ड तो सबसे खराब रहा। वे 7 दिसंबर 1971 से लेकर 20 दिसंबर 1971 तक यानी महज 13 दिन ही पाकिस्तान के पीएम रह पाए।
जुल्फिकार अली भुट्टो (Zulfikar Ali Bhutto)
- 20 दिसंबर 1971 से 13 अगस्त 1973 तक पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहने के बाद जुल्फिकार 14 अगस्त 1973 से पांच जुलाई 1977 तक देश के प्रधानमंत्री का पद संभाला। साल 1977 में पाकिस्तान के तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल मोहम्मद जिया-उल-हक के नेतृत्व में सेना ने तख्तापलट कर दिया और जुल्फिकार को 3 सितंबर 1977 को गिरफ्तार कर लिया गया। उनपर विपक्षी नेता की हत्या का आरोप लगा था। 18 मार्च 1978 को जुल्फिकार अली भुट्टो की लाहौर हाईकोर्ट ने उन्हें फांसी की सजा सुनाई। 3 अप्रैल 1979 को आधी रात उन्हें फांसी दे दी गई। इस तरह पाकिस्तान के एक ताकतवर नेता का दु:खद अंत हुआ।
- मुहम्मद खान जुनेजो: 24 मार्च 1985 को नॉन पार्टी बेस्ड इलेक्शन में प्रधानमंत्री बने मुहम्मद खान जुनेजो। एक इंडिपेंडेंट टिकट पर उनका चुनाव हुआ था लेकिन बाद में वह पाकिस्तान मुस्लिम लीग से जुड़ गए। पाकिस्तान के संविधान में हुए 8वें संशोधन के बाद राष्ट्रपति ने उन्हें हटा दिया।
- बेनजीर भुट्टो: जुल्फिकार अली भुट्टो की बेटी बेनजीर भुट्टो पाकिस्तान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। वह देश की पहली महिला नेत्री हुईं, जिन्होंने प्रमुख राजनीतिक पार्टी का नेतृत्व किया। 2 दिसंबर 1988 को वह प्रधानमंत्री बनीं। उनके कार्यकाल में कराची में हिंसा हुई और हालात बिगड़ गए, जिसके बाद 6 अगस्त 1990 को राष्ट्रपति ने उनकी सरकार को बर्खास्त कर दिया। 19 अक्टूबर 1993 को एक बार फिर से बेनजीर भुट्टो देश की प्रधानमंत्री बनीं। 1995 में एक बार फिर सैन्य तख्तापलट की कोशिश हुई, लेकिन वह इस बार बच गईं। हालांकि 5 नवंबर 1996 को राष्ट्रपति ने उनकी सरकार को बर्खास्त कर दिया।
- नवाज शरीफ (Nawaz Sharif) : 6 नवंबर 1990 को PML-N के नेता नवाज शरीफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनें। अप्रैल 1993 में राष्ट्रपति गुलाम इशक खान ने संविधान के आर्टिकल 58-2बी के तहत उनकी सरकार को डिजॉल्व कर दिया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने फिर से नवाज सरकार को बहाल किया। 26 मई 1993 को नवाज एक बार फिर वे देश के पीएम बने। हालांकि नवाज का दूसरा कार्यकाल 2 महीने भी नहीं चल सका और उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। फिर पाकिस्तान में फरवरी 1997 के चुनावों में उन्हें जबरदस्त जीत मिली और 17 फरवरी 1997 को उन्होंने एक बार फिर पीएम पद संभाला। हालांकि 3 फरवरी 1997 को जनरल परवेज मुशर्रफ ने उन्हें पद से हटाकर देश में मार्शल लॉ लागू कर दिया। इस तरह उन्होंने देश की सत्ता हथिया ली।
जफरुल्लाह से लेकर शौकत अजीज तक
- 21 नवंबर 2002 को पाकिस्तान के पीएम बनने वाले जफरुल्लाह खान जमाली ने 26 जून 2004 को पद से इस्तीफा दे दिया था। जमाली के इस्तीफे के बाद PML-Q के नेता शुजात हुसैन प्रधानमंत्री चुने गए। वे 30 जून 2004 को प्रधानमंत्री बने और 3 महीने भी पीएम पर पर नहीं रहे। फिर 20 अगस्त 2004 को शौकत अजीज ने पीएम की कुर्सी संभाली और संसदीय टर्म पूरा होने के बाद 16 नवंबर 2007 को उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया।
- यूसुफ रजा गिलानी का सबसे लंबा कार्यकाल: युसूफ रजा गिलानी पाकिस्ता न में सबसे लंबी अवधि तक शासन करने वाले प्रधानमंत्री हैं। 25 मार्च 2008 को गिलानी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने। वह 4 साल 86 दिन तक प्रधानमंत्री रहे। उम्मीद थी कि वे 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा करेंगे। लेकिन उनपर कोर्ट की अवमानना के आरोप लगे और आरोप साबित भी हुआ और अप्रैल 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें पीएम पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया। इस तरह वे अपना कार्यकाल पूरा करने से चूक गए।
- परवेज अशरफ और इमरान खान: राजा परवेज अशरफ ने 22 जून 2012 को प्रधानमंत्री बने, लेकिन वह एक साल से भी कम वक्त तक पद पर रहे। 25 मार्च 2013 को उन्होंने पीएम पद से इस्तीफा दे दिया। वहीं, शाहिद खाकन अब्बासी एक अगस्त 2017 से जुलाई 2018 तक पीएम पद पर रहे। 2018 में हुए आम चुनावों में इमरान खान को जीत मिली और वे प्रधानमंत्री बनाए गए।
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