चांदी की कीमतें लगातार नए रिकॉर्ड बना रही हैं। मंगलवार को ग्लोबल मार्केट में चांदी 94.75 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई, जबकि दिन के अंत में यह 93.25–93.30 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई। वहीं भारतीय बाजार में चांदी की कीमतें इतिहास रचते हुए 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के पार निकल गईं।
सिर्फ 3 हफ्तों में 30% रिटर्न
साल 2025 की शुरुआत से ही चांदी निवेशकों के लिए फायदे का सौदा बनकर उभरी है। महज तीन हफ्तों से भी कम समय में चांदी ने करीब 30 प्रतिशत का बंपर रिटर्न दिया है, जिसने सोने को भी पीछे छोड़ दिया।
चांदी क्यों है इतनी खास?
चांदी सिर्फ आभूषण या सिक्कों तक सीमित नहीं है। यह दुनिया की सबसे बेहतरीन इलेक्ट्रिकल और थर्मल कंडक्टर मानी जाती है। चांदी में इलेक्ट्रिक करंट तेजी से प्रवाहित होता है, इसी वजह से इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और मेडिकल उपकरणों में तेजी से बढ़ रहा है। इतना ही नहीं, चांदी में 95 से 99 प्रतिशत तक विजिबल लाइट को रिफ्लेक्ट करने की क्षमता होती है, जिससे इसकी इंडस्ट्रियल डिमांड और मजबूत होती है।
किन देशों के पास है चांदी का खजाना?
चांदी पृथ्वी की ऊपरी परत में पाई जाती है और यह अक्सर तांबा, सोना, सीसा और जस्ता जैसे अयस्कों के साथ मिलती है।
- पेरू – 1,40,000 मीट्रिक टन (सबसे बड़ा भंडार)
- ऑस्ट्रेलिया – 94,000 मीट्रिक टन
- रूस – 92,000 मीट्रिक टन
- चीन – 70,000 मीट्रिक टन
- पोलैंड – 61,000 मीट्रिक टन
- मेक्सिको – उत्पादन में नंबर 1 (6,300 मीट्रिक टन)
- भारत – 8,000 मीट्रिक टन भंडार, 800 मीट्रिक टन उत्पादन
आगे क्या रहेगी चाल?
वैश्विक अनिश्चितता, इंडस्ट्रियल डिमांड और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में चांदी की कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है।
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