खबर संसार, देहरादून : मोदी की Kedarnath यात्रा को लेकर पुरोहितों में नाराजगी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 05 नवंबर को बाबा केदारनाथ के दर्शन करने आ रहे है। ऐसे में प्रधानमंत्री की यात्रा को लेकर पुरोहितों ने नाराजगी जताई है। प्रधानमंत्री के Kedarnath दौरे को लेकर विरोध करना भी शुरू कर दिया है। पुरोहितों का कहना है कि देवस्थानम बोर्ड को लेकर सरकार की कथनी और करनी में अंतर है। सरकार ने एलान किया था कि समिति में तीर्थ पुरोहितों को शामिल किया जाएगा।
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लेकिन इसके बावजूद जिन लोगों को समिति में शामिल किया गया है, उनका तीर्थ पुरोहितों से कोई सरोकार ही नहीं है। उनके साथ धोखा हुआ है, जिसका वह पुरजोर विरोध करेंगे। जब तक देवस्थानम बोर्ड भंग नहीं हो जाता, विरोध प्रदर्शन नहीं रुकेंगे। पुरोहितों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मोदी की Kedarnath यात्रा को लेकर पुरोहितों में नाराजगी गए और पुरोहितों से मिलने के बाद विरोध कम करने की कोशिश भी की। और प्रधानमंत्री की तैयारियों का जानकारी भी ली।
चार घंटे रहेंगे प्रधानमंत्री Kedarnath धाम में
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के Kedarnath भ्रमण को लेकर शासन-प्रशासन अभी से पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। मोदी का कार्यक्रम चार घंटे का होगा। जिसमें नई दिल्ली से देहरादून व केदारनाथ पहुंचना व वापसी भी शामिल है।
इसलिए है पुरोहितों में नाराजगी
पुरोहितों का कहना है कि त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री रहते हुए जम्मू-कश्मीर के श्राइन बोर्ड की तर्ज पर देवस्थानम बोर्ड बनाने का फैसला किया था। जिसके बाद विधानसभा से देवस्थानम एक्ट भी पास किया गया। इसलिए पुरोहितों में उन पर गुस्सा ज्यादा है। देवस्थानम बोर्ड का मकसद यात्रा को व्यवस्थित करना है। लेकिन तीर्थ-पुरोहितों को डर है कि इसका असर उनकी आजीविका पर पड़ेगा। बोर्ड के फैसले के साथ ही तीर्थ पुरोहित लगातार विरोध कर रहे हैं।


