बांग्लादेश के सिराजगंज जिले में स्थित नोबेल laureate रवींद्रनाथ टैगोर के पैतृक घर ‘रवींद्र कचारीबाड़ी’ पर मंगलवार को एक उग्र भीड़ ने हमला कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना रविवार (8 जून) को पार्किंग शुल्क को लेकर एक आगंतुक और कर्मचारियों के बीच हुए विवाद के बाद भड़की। इस दौरान विरासत स्थल पर भारी तोड़फोड़ की गई।
सभागार और विरासत स्थल को पहुंचाया नुकसान
हमले में कचारीबाड़ी के सभागार, खिड़कियों के शीशे, दरवाजे और फर्नीचर को नुकसान पहुंचाया गया। रवींद्रनाथ टैगोर के इस ऐतिहासिक स्थल पर हुए हमले के बाद देश-विदेश में आक्रोश फैल गया है। यह हवेली न केवल एक सांस्कृतिक विरासत है बल्कि टैगोर के साहित्यिक योगदानों से भी गहराई से जुड़ी हुई है।
भाजपा ने जताई कड़ी आपत्ति
भारत में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस घटना पर कड़ा ऐतराज़ जताया है। पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि यह हमला पूर्व नियोजित था और इसके पीछे बांग्लादेश के कट्टरपंथी संगठन जैसे जमात-ए-इस्लामी और हिफाजत-ए-इस्लाम का हाथ है। उन्होंने इसे भारत-बांग्लादेश की साझा सांस्कृतिक विरासत पर हमला बताया।
पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने भी इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि यह हमारी पहचान और सांस्कृतिक मूल्यों पर सीधा आक्रमण है।
प्रशासन की कार्रवाई और जांच
हमले के बाद बांग्लादेश प्रशासन ने घटनास्थल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है और जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है। ढाका स्थित द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार (11 जून) को इस मामले में 50-60 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया, जिनमें से 10 को नामजद किया गया है।
रवींद्र कचारीबाड़ी का ऐतिहासिक महत्व
‘रवींद्र कचारीबाड़ी’ वह स्थान है जहाँ टैगोर परिवार शहजादपुर उपजिला में अपनी संपत्ति का प्रबंधन करता था। यह हवेली अब एक स्मारक संग्रहालय के रूप में संरक्षित है। टैगोर स्वयं कई बार यहाँ आए और अपने अनेक साहित्यिक रचनाओं की रचना भी यहीं की। यह स्थान न केवल साहित्य प्रेमियों के लिए, बल्कि भारत-बांग्लादेश के सांस्कृतिक रिश्तों का भी अहम प्रतीक है।
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