खबर संसार, नई दिल्ली : नवरात्रि का छठा दिन अर्थात मां Katyayani की पूजा-अर्चना, आज चैत्र नवरात्रि का छठा दिन है। इस दिन मां कात्यायनी पूजन करने का विधान है। मां की पूजा-अर्चना करने से मां की कृपा भक्तों पर सदैव बनी रहती है। मां Katyayani का विधिवत पूजन करने से सारी मनोकामनाएं पूर्ण होने के साथ कुंडली में विवाह योग भी मजबूत होता है। मां की भक्ति और ध्यान से मनुष्य को अर्थ, कर्म, काम, मोक्ष की प्राप्ति हो होती है।
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मां कात्यायनी को मां दुर्गा का छठा स्वरूप माना गया है। मां को खुश करने के लिए ”ऊँ देवी कात्यायन्यै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए। तो आइए जानते हैं मां कात्यायनी की पूजा- विधि, मंत्र, भोग और आरती के बारे में जिसके बाद मां अवश्य ही खुश हो जाएंगी।
मां Katyayani ने किया था महिषासुर का वध
देवी पुराण के अनुसार, कात्यायन ऋषि के घर उनकी बेटी के रुप में जन्म लेने के कारण ही मां दुर्गा के इस स्वरुप का नाम कात्यायनी पड़ा। मां Katyayani ने ही महिषासुर नामक राक्षस का वध किया था। राक्षसों का वध करने के कारण ही इन्हें दानवों, असुरों और पापियों का नाश करने वाली देवी महिसासुरमर्दिनी भी कहा जाता है।
ऐसे करें मां की पूजा-अर्चना
नवरात्रि के छठे दिन देवी कात्यायनी की पूजा करने के लिए सुबह स्नान के बाद लाल या पीले रंग का कपड़े धारण करने के बाद गंगाजल से पूजास्थल को शुद्ध कर लें। इसके बाद भगवान गणेश जी और सभी देवी-देवताओं का आह्वान करने के साथ माता को प्रणाम कर उनका ध्यान करें। मां को फल-फूल, कच्ची हल्दी की गांठ, रोली, सिंदूर और शहद अर्पित करें. इसके बाद धूप-दीप जलाकर मां की आरती करें।



