अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव तेजी से बढ़ता जा रहा है। हाल के दिनों में अमेरिका ने लैटिन अमेरिका में लगभग 10 हजार सैनिकों, एयरक्राफ्ट कैरियर, युद्धपोत और परमाणु पनडुब्बियों की तैनाती बढ़ाई है। इन कदमों के बाद ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका की सेना किसी बड़े सैन्य अभियान की तैयारी में है।
हालांकि, अमेरिकी दबाव के बावजूद वेनेजुएला झुकने को तैयार नहीं है। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो खुलकर अमेरिका को चुनौती दे रहे हैं और कह रहे हैं कि कोई भी हमला हुआ तो मुंहतोड़ जवाब मिलेगा।
रूसी हथियारों से लैस वेनेजुएला
वेनेजुएला ने अमेरिकी धमकियों का जवाब देने के लिए रूसी हथियारों पर भरोसा जताया है। मादुरो ने बताया कि उनकी सेना के पास 5,000 से ज्यादा ईग्ला-एस मानव पोर्टेबल मिसाइलें हैं — वही मिसाइलें जिनका इस्तेमाल भारत भी करता है। ये कंधे से दागी जाने वाली मिसाइलें अमेरिकी विमानों के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं।
रूस के बाद चीन भी वेनेजुएला के समर्थन में आ गया है। चीन ने अमेरिका की सैन्य गतिविधियों की निंदा करते हुए कहा कि यह लैटिन अमेरिका की स्थिरता के लिए खतरा है।
अमेरिका का ‘लोकतंत्र कार्ड’ और तेल पर सैंक्शन
मादुरो सरकार को कमजोर करने के लिए अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। बावजूद इसके, मादुरो सत्ता से हटने को तैयार नहीं हैं।
अब अमेरिका ने ‘लोकतंत्र की बहाली’ के नाम पर मरिया कोरीना मचाडो को आगे किया है। अमेरिकी समर्थन से सक्रिय मचाडो को हाल ही में नोबेल शांति पुरस्कार भी दिलाया गया। उनका कहना है कि अगर वह सत्ता में आती हैं तो अमेरिकी तेल कंपनियों को वेनेजुएला में वापस बुलाया जाएगा।
मचाडो का मोदी पर बयान
बढ़ते तनाव के बीच मचाडो ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कहा कि “मैं आजाद वेनेजुएला में पीएम मोदी की मेजबानी करने के लिए तैयार हूं।” इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नया मोड़ ला दिया है।
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