पाकिस्तान के कब्जे वाले पीओके से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिसका भारत को 78 सालों से इंतजार था। 1947 में पाकिस्तान द्वारा कब्जा किए गए इस इलाके में अब पीओके की जनता ने भारत समर्थक जंग छेड़ दी है। हाल ही में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि पीओके स्वयं भारत की ओर आएगा, और स्थानीय जनता ने इसे पूरी गंभीरता से लिया।
सड़क पर विरोध और पाकिस्तानी सेना की चुनौती
पीओके की जनता ने पाकिस्तानी सेना और पुलिस की गाड़ियों को नदी में फेंककर विरोध प्रदर्शन की शुरुआत की। कुछ ही समय में 250 से अधिक पाकिस्तानी सैनिक और पुलिसकर्मी बंधक बन गए। पाकिस्तानी पुलिस ने यहां सरेंडर कर दिया और प्रदर्शनकारियों ने उन्हें नजरबंद कर दिया।
मुख्य शहरों में व्यापक धरना-प्रदर्शन
रावलकोट, हजीरा, अब्बासपुर, खाई गाला, पनिओला और त्राखेल में हजारों लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। पाकिस्तानी मीडिया ने सड़कों पर अराजकता के वीडियो प्रसारित किए, जिनमें प्रदर्शनकारी गोलियाँ चलाते हुए दिखाई दिए। स्थानीय नागरिक पाकिस्तानी राजनेताओं और अधिकारियों के भ्रष्ट और अभिजात्य रवैये का विरोध कर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर और अंतरराष्ट्रीय समर्थन
जम्मू-कश्मीर संयुक्त जन कार्रवाई समिति के नेता शौकत नवाज मीर ने 1 अक्टूबर को मुजफ्फराबाद की ओर लंबा मार्च निकालने की घोषणा की है। यह विरोध प्रदर्शन सिर्फ पीओके तक ही सीमित नहीं है; ब्रिटेन सहित अन्य देशों में भी कश्मीरी प्रदर्शन कर रहे हैं। लंदन में पाकिस्तानी उच्चायोग और वाणिज्य दूतावास के बाहर प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगें रखी।
जनता की प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारियों की 38 प्रमुख मांगों में मुद्रास्फीति पर नियंत्रण, पेट्रोल और बिजली जैसी आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और पाकिस्तान सरकार से हस्तक्षेप शामिल हैं। पीओके की जनता ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका संघर्ष सिर्फ़ आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों के लिए नहीं, बल्कि भारत के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों को पुनः स्थापित करने के लिए भी है।
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