कांग्रेस नेता राहुल गांधी को हाल ही में आपराधिक मानहानि के एक मामले में दो साल की जेल की सजा सुनाए जाने के बाद लोकसभा सांसद के रूप में अयोग्य घोषित किया गया था। राहुल सोमवार (3 अप्रैल) को इस सजा के खिलाफ गुजरात के सूरत कोर्ट जा सकते हैं।
यहां वह अपनी सजा के खिलाफ याचिका दायर करेंगे और कोर्ट के फैसले को चुनौती देंगे। उम्मीद की जा रही है कि गांधी अपनी याचिका में कोर्ट से ‘मोदी सरनेम’ मामले में उन्हें दोषी ठहराने वाले मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द करने के लिए कहेंगे।
इससे पहले कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी और 30 दिनों के लिए सजा को निलंबित कर दिया था, ताकि उन्हें हाई कोर्ट में अपील करने का समय मिल सके। बीजेपी विधायक पूर्णेश मोदी की तरफ से उनकी कथित टिप्पणी के लिए एक शिकायत दर्ज की गई थी जिसमें लिखा था “सभी चोरों का उपनाम मोदी कैसे हो सकता है?”। इसके बाद चीफ ज्यूडिशल मजिस्ट्रेट एचएच वर्मा की अदालत ने 52 वर्षीय गांधी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 499 और 500 के तहत दोषी ठहराया था।
बीजेपी का आरोप
बीजेपी ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी की कानूनी टीम ने कोर्ट के आदेश को चुनौती देने के लिए पर्याप्त मुस्तैदी नहीं दिखाई, क्योंकि पार्टी कर्नाटक चुनाव से पहले इसे भुनाने की कोशिश कर रही है। सवाल उठे थे कि कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की गिरफ्तारी पर तत्काल कार्रवाई हुई थी, लेकिन राहुल गांधी की सजा के बाद नहीं। हालांकि, इसपर कांग्रेस की तरफ से सफाई भी आई थी।
क्या कहती है कांग्रेस?
मामले को लेकर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने पहले कहा था कि कानूनी टीम इस पर काम कर रही है। विपक्षी दलों ने हाल ही में राहुल को लोकसभा से अयोग्य घोषित किए जाने के खिलाफ अपना विरोध भी दर्ज कराया था। राज्य कांग्रेस के नेताओं और विभिन्न दलों के पदाधिकारियों ने गांधी के साथ एकजुटता दिखाने के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया।
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