खबर संसार, नई दिल्ली : आखिर क्या थे वो तीनों new कृषि कानून जो हो गए निरस्त, आखिर क्या थे वो तीनों new कृषि कानून जो हो गए निरस्त, आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्तिक पूर्णिमा के शुभ अवसर पर देश को संबोधित करते हुए तीनों नए कृषि कानूनों को रद्द करते हुए वापस लेने का ऐलान कर दिया। जिसको लेकर पिछले एक वर्ष के किसान यूनियन के लोग आंदोलन कर रहे थे। हालांकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति के सदस्य अनिल घटवट ने new तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने के के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। तो आइए जानते है कि क्या थे तीन नये कृषि कानून
पहला new कृषि कानून
पहले कृषि कानून को लेकर किसान मनचाही जगह पर अपनी फसल बेच सकते थे। इतना ही नहीं, बिना किसी अवरोध के दूसरे राज्यों में भी फसल बेच और खरीद सकते थे। कोई भी लाइसेंसधारक व्यापारी किसानों से परस्पर सहमत कीमतों पर उपज खरीद सकता था। इस कानून के तहत किसान अपनी फसलों को देश के किसी भी हिस्से में किसी भी व्यक्ति, दुकानदार, संस्था आदि को बेच सकते थे। इतना ही नहीं, किसान अपनी उपज की कीमत भी खुद तय कर सकते थे।
दूसरा new कृषि कानून
दूसरे कृषि कानून के तहत यह कानून किसानों को अनुबंध खेती करने और अपनी उपज का स्वतंत्र रूप से विपणन करने की अनुमति देने के लिए था। इसके तहत फसल खराब होने पर नुकसान की भरपाई किसानों को नहीं बल्कि एग्रीमेंट करने वाले पक्ष या कंपनियों द्वारा की जाती। इस कानून को लेकर केन्द्र सरकार का कहना था कि इसके जरिए किसानों को नुकसान का जोखिम कम रहेगा। इसके अलावा उन्हें फसल तैयार होने के बाद खरीदारों को जगह-जगह जाकर ढूंढने की भी जरूरत नहीं होगी।
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तीसरा new कृषि कानून
आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम। इस कानून के तहत असाधारण स्थितियों को छोड़कर व्यापार के लिए खाद्यान्न, दाल, खाद्य तेल और प्याज जैसी वस्तुओं से स्टॉक लिमिट हटा दी गई थी। काला बाजारी को रोकने के लिए सरकार ने इसके तहत व्यापारी एक सीमित मात्रा में ही किसी भी कृषि उपज का भंडारण कर सकते थे। वे तय सीमा से बढ़कर किसी भी फसल को स्टॉक में नहीं रख सकते थे।



