उत्तराखंड में कांग्रेस पार्टी के अंदर विवाद को खत्म करने के लिए कांग्रेस आलाकमान सक्रिय हो गया है। सूत्रों की माने तो केरल से लौट कर राहुल गांधी शुक्रवार को उत्तराखंड के नेताओं से मिल सकते हैं, जिसमें हरीश रावत (Harish Rawat) के भी मौजूद रहने की संभावना है। मुख्यमंत्री चेहरा बनाए जाने, टिकट बंटवारे में पर्याप्त भागीदारी को लेकर हरीश रावत पार्टी पर दबाव बना रहे हैं।
देवेंद्र यादव के तौर-तरीकों से भी उन्हें शिकायत Harish Rawat को
प्रभारी देवेंद्र यादव के तौर-तरीकों से भी उन्हें शिकायत है। बात नहीं बनी तो 5 जनवरी को हरीश रावत देहरादून में कोई बड़ा एलान कर सकते हैं। रावत समर्थकों को देहरादून में इकट्ठा होने को कहा गया है। रावत कैंप का दावा है कि उपेक्षा से नाराज हरीश रावत 5 जनवरी को राजनीति से संन्यास लेने का एलान कर सकते हैं।
हरीश रावत के साथ प्रीतम सिंह, राज्य के कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पार्टी नेता यशपाल आर्य भी शुक्रवार को दिल्ली पहुंचेंगे। बता दें की हरीश रावत के तेवर बुधवार को बगावती नजर आए और उन्होंने ट्वीट कर अपनी ही पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठा दिए।
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बुधवार को उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रावत ने ट्वीट किया था, ‘ है न अजीब सी बात, चुनाव रूपी समुद्र को तैरना है, संगठन का ढांचा अधिकांश स्थानों पर सहयोग का हाथ आगे बढ़ाने के बजाय या तो मुंह फेर करके खड़ा हो जा रहा है या नकारात्मक भूमिका निभा रहा है ।’
ट्वीट कर लगा आरोप
उन्होंने कहा था, ‘सत्ता ने वहां कई मगरमच्छ छोड़ रखे हैं और जिनके आदेश पर तैरना है, उनके नुमाइंदे मेरे हाथ-पांव बांध रहे हैं। मन में बहुत बार विचार आ रहा है कि हरीश रावत, अब बहुत हो गया, बहुत तैर लिए, अब विश्राम का समय है।’
हालांकि, रावत ने कहा था, ‘फिर चुपके से मन के एक कोने से आवाज उठ रही है कि “न दैन्यं न पलायनम्”। बड़ी उहापोह की स्थिति में हूं, नया वर्ष शायद रास्ता दिखा दे। मुझे विश्वास है कि भगवान केदारनाथ जी इस स्थिति में मेरा मार्गदर्शन करेंगे।’
जब इस ट्वीट के बारे में रावत के मीडिया सलाहकार सुरेंद्र कुमार से पूछा गया तो उन्होंने कहा था कि पार्टी के अंदर की कुछ ताकतें उत्तराखंड में पार्टी की संभावनाओं को प्रभावित करने के लिए बीजेपी के हाथों में खेल रही हैं।


