खबर संसार हल्द्वानी। विकास की बलि चढ़ते हरे पेड़, सड़ी गर्मी में दुकानों के आगे आ रहे पेड़ काट देने चाहिए! जी हा हल्द्वानी में तेजी के साथ दुकान शॉपिंग मॉल इत्यादि का तेजी से निर्माण हो रहा है। लोग अपने आगे सरकारी जमीन पर लगे पेड़ो को लॉपिंग के नाम पर काट डालते है। ऐसा होता आया है और शायद आगे भी होता रहेगा। अभी पर्यावरण दिवस को गए 5 दिन ही हुए है। गिने चुने पेड़ भी शहर में काट दिए जा रहे है।
विकास की बलि चढ़ते हरे पेड़,सड़ी गर्मी में दुकानों के आगे आ रहे पेड़ काट देने चाहिए!
हर साल दुनियाभर में 5 जून को पर्यावरण दिवस मनाया जाता है. पर्यावरण दिवस के जरिए लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरुक कराने की कोशिश की जाती है. इंसान के जीने के लिए सभी जरूरी चीजें हमें पर्यावरण से ही मिलती हैं. इसलिए जरूरी होता है कि हम पर्यावरण की रक्षा करें और धरती पर संतुलन बनाए रखें. आज के इस औद्योगिक सभ्यता वाले युग में पर्यावरण बुरी तरह से दूषित हो रहा है. पर्यावरण में प्रदूषण के बढ़ते लेवल की वजह से कभी बारिश तो कभी सूखे की स्थिति रहती है. ऐसे में जरूरी है कि लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरुक कराया जाए.
पर्यावरण का सरंक्षण के लिए पर्यावरण दिवस की स्थापना की गई थी । आइए बताते है कैसे हुई थी पर्यावरण दिवस की शुरुआत?1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने पर्यावरण प्रदूषण की समस्या को देखते हुए स्टाकहोम (स्वीडन) में विश्व भर के देशों का पहला पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया था, इसमें 119 देशों ने भाग लिया. इसी सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) का जन्म हुआ तथा हर साल 5 जून को पर्यावरण दिवस आयोजित करके नागरिकों को प्रदूषण की समस्या से अवगत कराने का निश्चय किया गया था. इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाते हुए राजनीतिक चेतना जागृत करना और आम जनता को प्रेरित करना था.
