भारत ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद जारी रहने की स्थिति में सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को बहाल नहीं किया जाएगा। केंद्र सरकार का कहना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को विश्वसनीय और स्थायी रूप से समाप्त नहीं करता, तब तक यह संधि निलंबित ही रहेगी।
ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ पर विदेश मंत्रालय का बयान
ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित मीडिया ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत की नीति को दोहराया। उन्होंने कहा कि देश को सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने का पूरा अधिकार है।
रणधीर जायसवाल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बात से अच्छी तरह परिचित है कि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद को अपनी राज्य नीति के एक साधन के रूप में इस्तेमाल करता रहा है। ऐसे में भारत अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद लिया गया था बड़ा फैसला
अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई रणनीतिक और कूटनीतिक कदम उठाए थे। इसी क्रम में सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्णय लिया गया था। इस हमले में कई निर्दोष नागरिकों की जान गई थी, जिसके बाद भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर अपना रुख और अधिक सख्त कर लिया।
क्या है सिंधु जल संधि?
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि पर 19 सितंबर 1960 को हस्ताक्षर हुए थे। विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई इस ऐतिहासिक संधि के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह प्रमुख नदियों के जल बंटवारे का ढांचा तय किया गया था। इस नदी प्रणाली में तीन पूर्वी नदियां—रावी, ब्यास और सतलुज तथा तीन पश्चिमी नदियां—सिंधु, झेलम और चिनाब शामिल हैं।
संधि के प्रावधानों के अनुसार पूर्वी नदियों का उपयोग मुख्य रूप से भारत को और पश्चिमी नदियों का अधिकांश जल पाकिस्तान को आवंटित किया गया था। कुल जल संसाधनों में लगभग 80 प्रतिशत हिस्से का लाभ पाकिस्तान को मिलता रहा है, जबकि भारत के हिस्से में लगभग 20 प्रतिशत जल आता है।
पाकिस्तान की कृषि और ऊर्जा पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था का बड़ा हिस्सा सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है। देश की लगभग 80 प्रतिशत खेती और कई प्रमुख बिजली परियोजनाएं इसी जल संसाधन पर आधारित हैं।
ऐसे में सिंधु जल संधि के निलंबन को भारत का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस फैसले का पाकिस्तान की जल उपलब्धता, कृषि उत्पादन और ऊर्जा क्षेत्र पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
आतंकवाद समाप्त होने तक नहीं बदलेगा भारत का रुख
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सिंधु जल संधि की बहाली का रास्ता पाकिस्तान के व्यवहार से जुड़ा हुआ है। भारत का कहना है कि जब तक सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना पूरी तरह बंद नहीं होता और उसके खिलाफ ठोस एवं अपरिवर्तनीय कदम नहीं उठाए जाते, तब तक संधि पर वर्तमान स्थिति बरकरार रहेगी। भारत ने यह भी दोहराया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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