पेपर लीक मामलों को लेकर भारत सरकार द्वारा लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध के खिलाफ Telegram अब अदालत पहुंच गई है। मैसेजिंग प्लेटफॉर्म ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सरकार के फैसले को चुनौती दी है। इस मामले पर आज सुनवाई होने की संभावना है।
सरकार ने हाल ही में टेलीग्राम की सेवाओं पर 22 जून तक अस्थायी रोक लगाने का आदेश दिया था। साथ ही 30 जून तक मैसेज एडिट फीचर को बंद रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। यह फैसला परीक्षा पेपर लीक मामलों में प्लेटफॉर्म के कथित इस्तेमाल को देखते हुए लिया गया।
टेलीग्राम CEO ने फैसले को बताया गलत
Telegram के संस्थापक और CEO Pavel Durov ने भारत सरकार के फैसले पर नाराजगी जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि कुछ लोगों द्वारा पेपर लीक सामग्री शेयर किए जाने की वजह से करोड़ों यूजर्स को सजा देना उचित नहीं है।
उन्होंने दावा किया कि भारत में टेलीग्राम के 15 करोड़ से अधिक यूजर्स हैं और अस्थायी बैन का असर सीधे आम लोगों पर पड़ रहा है। दुरोव के मुताबिक, प्लेटफॉर्म बंद होने के बावजूद लीक गतिविधियां दूसरी ऐप्स के जरिए जारी हैं।
पेपर लीक रोकने के लिए हटाए गए कई चैनल
पावेल दुरोव ने यह भी बताया कि टेलीग्राम ने पिछले कुछ हफ्तों में परीक्षा सामग्री और स्कैम से जुड़े सैकड़ों चैनल हटाए हैं। कंपनी ने एडिटेड मैसेज लेबल को ज्यादा स्पष्ट बनाने की दिशा में भी कदम उठाए हैं ताकि बैकडेटिंग और फर्जी जानकारी फैलाने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।
टेलीग्राम का कहना है कि वह पेपर लीक और ऑनलाइन फ्रॉड रोकने के लिए लगातार कार्रवाई कर रहा है, इसलिए पूरे प्लेटफॉर्म पर बैन लगाना सही कदम नहीं है।
सरकार ने क्यों लिया Telegram Ban का फैसला?
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी National Testing Agency का कहना है कि NEET UG 2026 Re-Exam की तैयारी कर रहे छात्रों को निशाना बनाने के लिए कई फर्जी नेटवर्क टेलीग्राम ग्रुप्स का इस्तेमाल कर रहे थे।
सरकार के अनुसार, IT कानून के तहत यह कार्रवाई इसलिए की गई ताकि पेपर लीक से जुड़े लोग इस प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग न कर सकें। अधिकारियों का मानना है कि टेलीग्राम के कुछ फीचर्स जैसे बड़े ग्रुप्स, हाई प्राइवेसी और बड़ी फाइल शेयरिंग की सुविधा चीटिंग नेटवर्क को बढ़ावा दे सकती है।
आज की सुनवाई पर टिकी नजरें
अब इस पूरे मामले पर सबकी नजर दिल्ली हाई कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हुई है। अदालत का फैसला यह तय करेगा कि टेलीग्राम पर लगाया गया अस्थायी प्रतिबंध जारी रहेगा या कंपनी को राहत मिलेगी।
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