श्रीनगर गढ़वाल, 18 जून: हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर में बुधवार को विश्वविद्यालय स्थापना आंदोलन के प्रमुख सूत्रधार और प्रख्यात समाजसेवी स्वामी मन्मथन की आवक्ष प्रतिमा का अनावरण किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने प्रतिमा का लोकार्पण किया।
स्वामी मन्मथन प्रेक्षागृह परिसर में स्थापित इस प्रतिमा का निर्माण प्रसिद्ध मूर्तिकार प्रो. अवतार सिंह पंवार द्वारा किया गया है। वहीं, प्रतिमा को विश्वविद्यालय तक पहुंचाने में चंद्रकुंवर बर्त्वाल शोध संस्थान के सचिव डॉ. योगम्बर सिंह बर्त्वाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कुलपति बोले- स्वामी मन्मथन का योगदान हमेशा रहेगा यादगार
स्वामी मन्मथन के जन्मदिवस पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि गढ़वाल विश्वविद्यालय की स्थापना में स्वामी मन्मथन की भूमिका ऐतिहासिक रही है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस विशेष तिथि को संस्थान के आधिकारिक कैलेंडर में दर्ज करेगा और हर वर्ष उनके योगदान को समर्पित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
कुलपति ने यह भी जानकारी दी कि अगले शैक्षणिक सत्र से उत्तराखंड की विभूतियों और सांस्कृतिक विरासत पर आधारित दो क्रेडिट का नया पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही गढ़वाली भाषा, संस्कृति संरक्षण एवं संवर्द्धन केंद्र और लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के विस्तार की योजनाओं पर भी काम किया जा रहा है।
वक्ताओं ने आंदोलन में स्वामी मन्मथन की भूमिका को बताया ऐतिहासिक
कार्यक्रम में स्वामी मन्मथन के सहयोगी और श्रीनगर के पूर्व पालिकाध्यक्ष कृष्णानंद मैठाणी ने कहा कि गढ़वाल विश्वविद्यालय की स्थापना किसी सरकारी पहल का परिणाम नहीं, बल्कि एक जनआंदोलन की सफलता थी। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन को दिशा देने और सफल बनाने में स्वामी मन्मथन की भूमिका सबसे अहम रही।
नंदा देवी राजजात समिति के सचिव भुवन नौटियाल ने कहा कि स्वामी मन्मथन के नेतृत्व में चला विश्वविद्यालय आंदोलन आजादी से पहले और बाद के सबसे प्रभावशाली आंदोलनों में गिना जाता है। वहीं, श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम के सचिव ज्ञान सिंह रावत ने कहा कि स्वामी मन्मथन के आदर्शों और मार्गदर्शन की वजह से ही आश्रम आज देश की अग्रणी संस्थाओं में अपनी पहचान बना पाया है।
कई शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता रहे मौजूद
समारोह में भारतीय वन सेवा के पूर्व अधिकारी प्रवीण थपलियाल ने भी अपने विचार रखे। विचार गोष्ठी का संचालन डॉ. जयप्रकाश पंवार ने किया। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. वाई.पी. रैवानी, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. ओ.पी. गुसांई, प्रो. एम.एम. रौथाण, प्रो. एन.एस. पंवार, प्रो. हरभजन सिंह चौहान, प्रो. एस.एस. बिष्ट, प्रो. आर.के. मैखुरी, प्रो. डी.एस. बिष्ट, प्रो. एम.सी. सती, प्रो. अजीत नेगी, प्रो. रमा मैखुरी, प्रो. मंजू गुसांई, डॉ. अनुजा रावत, डॉ. विजयकांत पुरोहित समेत बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी, छात्रसंघ पदाधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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