टेलीकम्युनिकेशन और ब्रॉडकास्टिंग क्षेत्र में बड़ा बदलाव आने की तैयारी है। प्रसार भारती जल्द D2M यानी डायरेक्ट-टू-मोबाइल ब्रॉडकास्टिंग सर्विस की कमर्शियल लॉन्चिंग के लिए RFP जारी कर सकती है। इससे मोबाइल पर बिना इंटरनेट डेटा के लाइव न्यूज, स्पोर्ट्स और अन्य मल्टीमीडिया कंटेंट देखने की सुविधा मिल सकेगी।
प्रसार भारती जल्द जारी कर सकती है RFP
देश के पब्लिक ब्रॉडकास्टर Prasar Bharat बहुत जल्द D2M यानी ‘डायरेक्ट-टू-मोबाइल’ ब्रॉडकास्टिंग सर्विस की कमर्शियल लॉन्चिंग के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी करने की उम्मीद है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रसार भारती अगले महीने यह RFP जारी कर सकती है। टेस्टिंग के बाद इसे बड़े पैमाने पर देशभर में लॉन्च करने की तैयारी है। सरकारी रिव्यू में तेजस नेटवर्क्स के विकसित डिवाइस के तकनीकी वेलिडेशन टेस्ट सफल होने के बाद योजना ने रफ्तार पकड़ी है।
इंटरनेट के बिना कैसे काम करेगी D2M तकनीक?
D2M तकनीक 4G/5G जैसे पारंपरिक सेलुलर नेटवर्क पर निर्भर नहीं करती। यह स्मार्टफोन में मौजूद विशेष रिसीवर के जरिए रेडियो फ्रीक्वेंसी तरंगों को सीधे पकड़ती है। यह कुछ हद तक इंटरनेट के बिना FM रेडियो के काम करने जैसी है।
इससे यूजर बिना मोबाइल डेटा खर्च किए लाइव न्यूज, स्पोर्ट्स, एंटरटेनमेंट और अन्य मल्टीमीडिया कंटेंट देख सकेंगे। कमजोर मोबाइल नेटवर्क वाले ग्रामीण और सुदूर इलाकों में भी इसका उपयोग हो सकता है। इससे वीडियो स्ट्रीमिंग से मोबाइल नेटवर्क पर बढ़ने वाला ट्रैफिक लोड कम हो सकता है। हालांकि, रिलायंस जियो और एयरटेल जैसी निजी टेलीकॉम कंपनियों ने इस तकनीक को लेकर चिंता जताई है।
IIT कानपुर के साथ हुए ट्रायल
प्रसार भारती और IIT कानपुर की स्पेशल स्टडी में पाया गया कि 470-582 MHz बैंड में D2M ब्रॉडकास्टिंग से मोबाइल नेटवर्क में हानिकारक इंटरफेरेंस नहीं होता और स्मार्टफोन में हीटिंग की समस्या भी नहीं आती। प्रसार भारती ने IIT Kanpur और Saankhya Labs (अब तेजस नेटवर्क्स) के साथ दिल्ली, बेंगलुरु समेत 19 से अधिक शहरों में सफल ट्रायल पूरे किए हैं।
D2M के लिए हार्डवेयर सबसे बड़ी चुनौती
मौजूदा अधिकांश स्मार्टफोन D2M को सपोर्ट नहीं करते। इसके लिए ATSC 3.0 स्टैंडर्ड वाले हार्डवेयर, अलग बेसबैंड प्रोसेसिंग यूनिट, एंटीना, लो-नॉइज़ एम्पलीफायर्स और बेसबैंड फिल्टर की जरूरत होगी। साथ ही, देश के मौजूदा एंटीना और नेटवर्क सेटअप को बड़े पैमाने के प्रसारण के लिए मजबूत करना होगा। इसके लिए पूरे देश में टावरों का मजबूत नेटवर्क तैयार करना होगा।
10 प्वाइंट में समझें D2M तकनीक
- D2M का अर्थ डायरेक्ट-टू-मोबाइल ब्रॉडकास्टिंग है।
- प्रसार भारती जल्द RFP जारी कर सकती है।
- यह तकनीक 4G/5G नेटवर्क पर निर्भर नहीं करती।
- मोबाइल में विशेष रिसीवर रेडियो फ्रीक्वेंसी पकड़ता है।
- बिना डेटा खर्च किए लाइव कंटेंट देखा जा सकेगा।
- लाइव न्यूज, स्पोर्ट्स और एंटरटेनमेंट उपलब्ध हो सकते हैं।
- 470-582 MHz बैंड में तकनीक का अध्ययन किया गया है।
- 19 से अधिक शहरों में ट्रायल पूरे किए जा चुके हैं।
- अधिकांश मौजूदा स्मार्टफोन D2M को सपोर्ट नहीं करते।
- बड़े स्तर पर टावर और हार्डवेयर इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी।
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