दिल्ली में प्रदर्शन को लेकर पुलिस के खिलाफ दायर दो याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने शहर में आवाजाही और इंटरनेट सेवाएं जारी रखने का निर्देश दिया। साथ ही, मेट्रो और ट्रेनों का संचालन पूरी तरह बंद नहीं करने तथा प्रदर्शनकारियों को नियमों का पालन करने की बात कही।
दिल्ली प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का अहम निर्देश
दिल्ली में प्रदर्शन को लेकर पुलिस के खिलाफ दायर दो याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस जयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि शहर में लोगों की आवाजाही नहीं रोकी जानी चाहिए और इंटरनेट सेवाएं बिना रुकावट जारी रहनी चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि मेट्रो और ट्रेनों का संचालन नियंत्रित तरीके से किया जा सकता है, लेकिन इन्हें पूरी तरह बंद नहीं किया जाना चाहिए।
प्रदर्शन का अधिकार, लेकिन नियमों का पालन जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 9 अक्टूबर के आदेश में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। अदालत ने कहा कि लोगों को विरोध-प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन उन्हें पुलिस एक्ट के तहत बनाए गए नियमों का पालन करना होगा।
पीठ ने कहा कि पुलिस की ओर से लगाए गए प्रतिबंध संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत किस हद तक उचित हैं, यह विचार का विषय है। अदालत ने यह भी कहा कि प्रदर्शन का अधिकार पुलिस एक्ट से ऊपर नहीं हो सकता।
आवाजाही और इंटरनेट सेवाओं पर क्या कहा?
अदालत ने निर्देश दिया कि कानून के मुताबिक शहर में लोगों की आवाजाही जारी रहनी चाहिए। कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए बैरिकेड लगाने की आवश्यकता की दोबारा जांच करने को भी कहा गया।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि शांतिपूर्ण और निहत्थे लोगों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में नहीं रखा जाए, खासकर उस इलाके के बाहर जहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू है।
सुप्रीम कोर्ट के आसपास भी धारा 163 के तहत प्रतिबंध लगाए जाने की जानकारी दी गई। इस पर अदालत ने अधिकारियों को प्रतिबंध हटाने का निर्देश दिया, ताकि लोगों को अदालत आने-जाने और न्याय पाने में परेशानी न हो।
दो याचिकाओं में पुलिस कार्रवाई को चुनौती
पहली याचिका वकील शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी ने दाखिल की। इसमें केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के अध्यक्ष डी. थारा के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई। याचिका में 9 अक्टूबर के आदेश का पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया।
दूसरी याचिका वरिष्ठ वकील और तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद मेनका गुरुस्वामी ने दायर की। इसमें विपक्षी नेताओं को एहतियातन हिरासत में लेने को चुनौती दी गई। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के मौलिक अधिकार को दबाने के लिए एहतियातन हिरासत का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
कपिल सिब्बल ने अदालत का जताया आभार
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुनवाई के लिए अदालत का शुक्रिया अदा किया। इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि अदालत देश की सेवा के लिए हमेशा मौजूद है। दिल्ली पुलिस और सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए।
13 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई मंगलवार, 13 अक्टूबर को होगी।
दिल्ली प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट के 10 बड़े निर्देश और अपडेट
- दिल्ली प्रदर्शन को लेकर पुलिस के खिलाफ दो याचिकाओं पर सुनवाई हुई।
- सुप्रीम कोर्ट ने शहर में लोगों की आवाजाही जारी रखने को कहा।
- इंटरनेट सेवाएं बिना रुकावट जारी रखने का निर्देश दिया गया।
- मेट्रो और ट्रेनों का संचालन पूरी तरह बंद नहीं करने को कहा गया।
- प्रदर्शनकारियों को पुलिस एक्ट के नियमों का पालन करना होगा।
- बैरिकेड लगाने की आवश्यकता की दोबारा जांच करने का निर्देश दिया गया।
- शांतिपूर्ण और निहत्थे लोगों की गैरकानूनी हिरासत पर अदालत ने चिंता जताई।
- सुप्रीम कोर्ट के आसपास धारा 163 के तहत लगाए गए प्रतिबंध हटाने का निर्देश दिया गया।
- शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी और मेनका गुरुस्वामी ने अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की थीं।
- मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।






