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भोजशाला: ASI ने पेश की रिपोर्ट, गणेश, ब्रह्मा, नरसिंह, भैरव की मूर्तियां मिलीं

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के समक्ष विवादित भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर पर अपनी वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में कई ऐतिहासिक कलाकृतियों की खोज को दर्शाया गया है जो विवादित परिसर के मंदिर की स्थिति का संकेत देते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्वेक्षण के दौरान चांदी, तांबे, एल्यूमीनियम और स्टील से बने कुल 31 सिक्के मिले, विभिन्न कालखंडों के हैं। ये सिक्के इंडो-ससैनियन (10वीं-11वीं सदी), दिल्ली सल्तनत (13वीं-14वीं सदी), मालवा सल्तनत (15वीं-16वीं सदी), मुगल (16वीं-18वीं सदी), धार राज्य (19वीं सदी) और (19वीं-20वीं शताब्दी) ब्रिटिश काल के हैं।

सर्वे में क्या-क्या मिला जाने

सर्वेक्षण में कुल 94 मूर्तियां, मूर्तियों के टुकड़े और वास्तुशिल्प तत्व भी सामने आए। ये मूर्तियां बेसाल्ट, संगमरमर, शिस्ट, नरम पत्थर, बलुआ पत्थर और चूना पत्थर से बनी हैं। वे गणेश, ब्रह्मा, नरसिम्हा, भैरव, अन्य देवी-देवताओं, मनुष्यों और जानवरों जैसे देवताओं की आकृतियाँ दर्शाते हैं।

जानवरों की आकृतियों में शेर, हाथी, घोड़े, कुत्ते, बंदर, साँप, कछुए, हंस और पक्षी शामिल हैं। पौराणिक आकृतियों में कीर्तिमुख (शानदार चेहरे) और व्याल (मिश्रित जीव) के विभिन्न रूप शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इंसानों और जानवरों की कई छवियों को विरूपित या उकेरा गया है, खासकर उन इलाकों में जहां अब मस्जिदें खड़ी हैं।

वर्तमान संरचना में पाए गए कई टुकड़ों में संस्कृत और प्राकृत शिलालेख हैं, जो साहित्यिक और शैक्षिक गतिविधियों का संकेत देते हैं। एक शिलालेख में परमार वंश के राजा नरवर्मन (जिन्होंने 1094-1133 ईस्वी के बीच शासन किया) का उल्लेख है। अन्य शिलालेखों में खिलजी शासक महमूद शाह का उल्लेख है, जिसने एक मंदिर को मस्जिद में बदल दिया था।

भोजशाला कॉम्प्लेक्स विवाद

11वीं सदी के स्मारक भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमल मौला मस्जिद कहता है। पिछले 21 वर्षों से हिंदुओं को मंगलवार को भोजशाला में पूजा करने की अनुमति है, जबकि मुसलमानों को शुक्रवार को उस स्थान पर नमाज अदा करने की अनुमति है। मामले में याचिकाकर्ता हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने इस व्यवस्था को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। 11 मार्च को उच्च न्यायालय ने ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ के आवेदन पर एएसआई को परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का आदेश दिया। सर्वेक्षण पूरा करने के लिए एएसआई को छह सप्ताह का समय दिया गया था।

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