खबर संसार, नई दिल्ली: बड़ा खुलासा: 56 प्रतिशत सैनिटाइजर बाजार में नकली (Fake) बेचा जा रहा है जिसको लेकर उत्तराखं डमें स्पेक्स द्वारा किये गए सैनिटाइजर पर अध्ययन में बड़ा खुलासा हुआ है। स्पेक्स ने दावा किया है कि बाजार मिलने वाला अधिकतर सैनिटाइजर मानकों के अनुरूप नहीं हैं।
56 प्रतिशत सैनिटाइजर में अल्कोहल मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया है। लिए गए 1050 नमूनों में 578 नमूने फेल पाए गए हैं। और बाजार में धड़ल्ले से नकली (Fake) सैनिटाइजर का कारोबार खूब फल-फूल रहा है।
”स्पेक्स ” प्रयोगशाला भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त
”स्पेक्स ” जिसकी प्रयोगशाला विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार द्धारा मान्यता प्राप्त है, उसके अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि, इनके द्वारा मार्केट में बिक रहे सैनिटाइजर और घरों में लोगों द्वारा इस्तेमाल किये जा रहे सैनिटाइजर को लेकर उनका परीक्षण किया गया।
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नकली (Fake) सैनिटाइजरटेस्टिग में नमूने फेल
कहीं आपके घर में नकली (Fake) सैनिटाइजर तो नहीं पहुंच रहा इसका भी बेहद ध्यान रखें। सैनिटाइजर टेस्टिंग अभियान में 1050 में 578 नमूने फेल हुई। 56 फीसदी सैनिटाइजर में अल्कोहल मानकों में खरे नहीं उतरे हैं, 8 नमूनों में मेथेनॉल पाया गया है। 278 नमूनों में टॉक्सिक रंग पाया गया। अल्कोहल की प्रतिशत मात्रा 60 से 70 प्रतिशत होना चाहिए। हाइड्रोजन परऑक्साइड की मात्रा 0.5 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
नकली सैनिटाइजर से हो सकती है मौत
मेथनॉल त्वचा को खराब भी कर सकता है, तीव्र मेथनॉल की मात्रा होने से सिरदर्द, कमजोरी, उनींदपर, मिचली, सांस लेने में कठिनाई, आंखों में जलन के साथ-साथ बेचैनी के साथ संभवतरू मौत भी हो सकती है। यहां तक कि नकली सैनिटाइजर से लोगों की मौत तक हो सकती है।
इस बीच डाॅक्टरों का कहना है कि डाक्टरों का कहना है कि कोरोना काल में सैनिटाइजर किसी हथियार से कम नहीं है, लेकिन हथियार पर ही सवाल उठने लगे तो ये बात चिंता पैदा करती है। ऐसे में जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।



