थाईलैंड और कंबोडिया के बीच चल रहे सैन्य टकराव में चीनी हथियारों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि कंबोडियाई सेना द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा चीनी मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम (MLRS) फायरिंग के दौरान अचानक फट गया। इस हादसे में कम से कम आठ कंबोडियाई सैनिकों की मौत हो गई।
फायरिंग के दौरान हुआ विस्फोट
वीडियो में देखा जा सकता है कि MLRS के बेहद करीब आधा दर्जन सैनिक खड़े थे। एक सैनिक मोबाइल से फायरिंग रिकॉर्ड कर रहा था। सिस्टम से लगातार छह रॉकेट दागे गए, लेकिन इसके तुरंत बाद लॉन्चर में भीषण विस्फोट हो गया और आग लग गई। चंद सेकंड में पूरा सिस्टम जलते मलबे में तब्दील हो गया।
रूस की कॉपी है चीनी PHL-81
कंबोडियाई सेना जिस हथियार का इस्तेमाल कर रही थी, वह चीन में निर्मित PHL-81 रॉकेट सिस्टम है। यह सोवियत संघ के मशहूर BM-21 ग्रैड MLRS की कॉपी माना जाता है। दिलचस्प बात यह है कि भारतीय सेना भी ग्रैड सिस्टम ऑपरेट करती है, जो 20 सेकंड में 40 रॉकेट दागने की क्षमता रखता है, लेकिन अब तक इसकी विश्वसनीयता पर सवाल नहीं उठे।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद फिर सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब चीनी हथियारों की नाकामी उजागर हुई हो। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल किए गए चीनी एयर डिफेंस सिस्टम HQ-9 और LY-80 भारतीय एयरस्ट्राइक और ब्रह्मोस मिसाइल को न तो रोक पाए और न ही समय पर डिटेक्ट कर सके।
JF-17 सौदे पर भी संदेह
इसी बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने लीबिया को JF-17 फाइटर जेट बेचते समय दावा किया कि इसने भारतीय राफेल और सुखोई को मार गिराया था। हालांकि पाकिस्तान आज तक इस दावे का कोई सबूत, मलबे की तस्वीर या वीडियो पेश नहीं कर पाया है।
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