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8 लाख राशन कार्डों पर सरकार की नजर, कहीं आपका नाम भी तो नहीं?

झारखंड सरकार ने राशन कार्ड व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया है। खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने राज्यभर में ऐसे राशन कार्डों की जांच शुरू कर दी है, जिनका लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हो रहा है। विभाग के अनुसार 8 लाख से अधिक राशन कार्ड फिलहाल जांच के दायरे में हैं।

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी राशन योजना का लाभ केवल वास्तविक और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे। जांच के दौरान गड़बड़ी मिलने पर संबंधित राशन कार्ड रद्द किए जा सकते हैं।

क्यों हो रही है राशन कार्डों की जांच?

राज्य सरकार के मुताबिक कई नए आवेदनों और नाम जोड़ने की प्रक्रिया लंबित है। ऐसे में निष्क्रिय और फर्जी राशन कार्डों की पहचान कर पात्र लोगों को योजना का लाभ देने की तैयारी की जा रही है।

इस अभियान के तहत विभाग यह पता लगा रहा है कि—

  • कौन से राशन कार्ड लंबे समय से उपयोग में नहीं हैं
  • किन कार्डों में गलत जानकारी दर्ज है
  • कौन से राशन कार्ड डुप्लीकेट या संदिग्ध हैं

जांच में मिले हजारों डुप्लीकेट और संदिग्ध कार्ड

खाद्य विभाग की प्रारंभिक जांच में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। विभाग के अनुसार—

  • 21,750 डुप्लीकेट राशन कार्ड चिन्हित किए गए हैं
  • 12,284 संदिग्ध राशन कार्ड मिले हैं
  • कुछ जिलों में गड़बड़ी के मामलों की संख्या अधिक पाई गई है

सरकार अब इन कार्डों का फिजिकल और डिजिटल सत्यापन कर रही है।

किन लोगों का राशन कार्ड हो सकता है रद्द?

सरकार ने आर्थिक रूप से सक्षम लोगों से 30 जून तक स्वेच्छा से राशन कार्ड सरेंडर करने की अपील की है। विभाग ने साफ किया है कि अपात्र लोग यदि योजना का लाभ लेते पाए गए तो उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

इन परिस्थितियों में राशन कार्ड रद्द किया जा सकता है—

  • पिछले 6 महीने या 1 साल से राशन नहीं लिया हो
  • परिवार के पास चार पहिया वाहन हो
  • पांच एकड़ या उससे अधिक कृषि भूमि हो
  • आयकरदाता होने के बावजूद योजना का लाभ लिया जा रहा हो

जांच में दोषी पाए जाने पर सरकार लाभार्थी से अब तक ली गई सब्सिडी राशि की वसूली भी कर सकती है।

नए सदस्य का नाम जोड़ने के लिए जरूरी होगा ई-केवाईसी

सरकार ने राशन कार्ड में नए सदस्य का नाम जोड़ने के नियम भी सख्त कर दिए हैं। अब आधार आधारित ई-केवाईसी और बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य होगा।

विभाग के अनुसार—

  • आधार आधारित ई-केवाईसी जरूरी होगी
  • बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद ही नाम जुड़ेगा
  • बिना सत्यापन किसी भी नए सदस्य का नाम शामिल नहीं किया जाएगा

सरकार का फोकस जरूरतमंद परिवारों तक लाभ पहुंचाना

राज्य सरकार का कहना है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य राशन वितरण प्रणाली को पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। इससे फर्जी लाभार्थियों को हटाकर वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को योजना का लाभ मिल सकेगा।


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