खबर संसार, वाराणसी : काशी विश्वनाथ काॅरीडोर का 436 years में तीसरी बार जीर्णोद्धार, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत समेटे पुरातन नगरी वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ का ज्योर्तिलिंग 12 ज्योर्तिलिंगों में सबसे महत्वपूर्ण है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज विश्वनाथ कॉरिडोर धाम का लोकार्पण करने पहुंचे हैं। ये कॉरिडोर बनने के बाद गंगा घाट से सीधे कॉरिडोर के रास्ते बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए जा सकते हैं। इसकी कुल लगात 900 करोड़ रुपए है।
इससे पहले प्रधानमंत्री ने 8 मार्च 2019 को काशी विश्वनाथ मंदिर के कायाकल्प का शिलान्यास किया था। प्रधानमंत्री अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दो दिवसीय दौरे पर हैं। जहां 436 years में तीसरी बार काशी विश्वनाथ काॅरीडोर का जीर्णोद्धार होगा।
13 तारीख का चयन एक खास रणनीति का हिस्सा
इस दौरान पीएम मोदी काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के फेज-1 का उद्घाटन करेंगे, जिसके निर्माण पर 339 करोड़ रुपए का खर्च आया है। इस ऐतिहासिक अवसर की महत्ता को उजागर करते ट्वीट में पीएम मोदी लिखते हैं कि ”काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से वाराणसी की आध्यात्मिक चमक विश्व के कोने-कोने में फैलेगी।” यही नहीं, पीएम एम मोदी ने कॉरिडोर के लिए 13 तारीख का चयन भी खास रणनीति के तहत किया है। इसी तारीख को लोकतंत्र के मंदिर कहे जाने वाले संसद पर आतंकी हमला हुआ था। दूसरे 14 दिसंबर से खरमास भी शुरू हो रहा है। ऐसे में 13 तारीख का चयन एक खास रणनीति का हिस्सा है।

352 साल पहले रानी अहिल्याबाई ने कराया था जीर्णोद्धार
352 साल पहले रानी अहिल्याबाई ने काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। अब बाबा विश्वनाथ को संकरी और बदबूदार गलियों के बीच से निकालकर उसे भव्य स्वरूप देने का काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है। यहां बताते चलें कि मुगल शासक औरंगजेब के फरमान से 1669 में आदि विश्वेश्वर के मंदिर को ध्वस्त किए जाने के बाद 1777 में मराठा साम्राज्य की महारानी अहिल्याबाई ने विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था।
436 years बाद मंदिर का जीर्णोद्धार
1835 में राजा रणजीत सिंह ने मंदिर के शिखर को स्वर्ण मंडित लगाकर बाबा विश्वनाथ को भव्यता प्रदान की थी। तो राजा औसानगंज त्रिविक्रम सिंह ने मंदिर के गर्भगृह के लिए चांदी के दरवाजे लगवाए थे। औरंगजेब से पहले 1194 में कुतुबुद्दीन ऐबक ने काशी विश्वनाथ मंदिर पर हमला किया था। 13वीं सदी में एक गुजराती व्यापारी ने मंदिर का नवीनीकरण कराया तो 14वीं सदी में शर्की वंश के शासकों ने मंदिर को नुकसान पहुंचाया। 1585 में एक बार फिर टोडरमल ने काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कराया था. अब 436 साल में तीसरी बार मंदिर का जीर्णोद्धार विश्वनाथ धाम के रूप में हुआ है।
काशी विश्वनाथ मंदिर को हर महीने मिलता एक करोड़ दान
मिली जानकारी के अनुसार बता दें कि काशी विश्वनाथ मंदिर को हर महीने दान के जरिए 70 लाख रुपये और हेल्पडेस्क के जरिए हर महीने 1 करोड़ रुपये मिलते हैं। बता दें कि मंदिर के हेल्पडेस्क काउंटर के जरिए अनुष्ठानों, धार्मिक क्रियाओं, आरती और अन्य गतिविधियों के लिए मैनुअल और ऑनलाइन टिकटों की बिक्री होती है। मंदिर मंदिर में हर रोज करीब 10 हजार श्रद्धालु और पर्यटकों का आते हैं. त्यौहारों के दौरान भक्तों की संख्या रोजाना 20 हजार के पार पहुंच जाती है।


