खबर संसार कालाढूंगी (कुमाऊं), 31 जुलाई 2025 —बहुत बड़ी ख़बर वीआईपी सीट रामनी आनसिंह से छवि बोहरा की जीत ने भाजपा के अरमानो पर प्रहार कर दिया. उत्तराखंड पंचायत चुनाव 2025 के परिणाम भाजपा के लिए एक और झटका लेकर आए। कुमाऊं के कालाढूंगी क्षेत्र से भाजपा समर्थित उम्मीदवार बेला तोलिया जो जिला पंचायत सदस्य पद के लिए मैदान में थे, को इस बार हार का सामना करना पड़ा है।
भाजपा की आधिकारिक उम्मीदवारी बेअसर रही
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भाजपा ने बेला तोलिया को रामड़ियां सिंह पनीयाली से अधिकृत उम्मीदवार घोषित कर चुनाव में पूरी ताकत झोंकी थी। हालांकि स्थानीय मुद्दों, मतदाता संतुलन और युवा-नेतृत्व की सक्रियता ने भाजपा की रणनीति को कमजोर कर दिया। शुरुआती रुझानों और सोशल मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, पनीयाली की स्थिति शुरुआत से ही डगमगाती नजर आई।
तीर कमान, कप-प्लेट और महिलाएं बनीं निर्णायक
कुमाऊं की विभिन्न पंचायतों में इस बार चुनावी मुकाबला बेहद त्रिकोणीय रहा—भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच। विशेष बात यह रही कि कई क्षेत्रों में युवा और महिला उम्मीदवारों ने जोरदार प्रदर्शन कर परंपरागत दलों को कड़ी टक्कर दी। चमोली में 23 वर्षीय नितिन प्रधान बने, देहरादून में साक्षी थापा व सोनिया की जोड़ी उभरी, और नैनीताल-पिथौरागढ़ में महिला प्रधानों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।
भाजपा को लगातार दूसरा झटका, बदलती स्थानीय राजनीति
पहले चरण में ही अपेक्षित सीटें न जीत पाने के बाद रामड़ियां सिंह की हार भाजपा के लिए दूसरा बड़ा राजनीतिक झटका है। स्थानीय गठबंधन, आत्मनिर्भरता और जमीन से जुड़े मुद्दों ने भाजपा की पारंपरिक पकड़ को कमजोर किया। राज्य नेतृत्व की रणनीति ग्रामीण क्षेत्रों में उतनी कारगर नहीं रही, जितनी अपेक्षा की जा रही थी।
स्थानीय संकेत: युवा और महिला नेतृत्व की दस्तक
इस चुनाव से स्पष्ट है कि ग्रामीण राजनीति में युवा और महिला नेतृत्व की धार बढ़ रही है। भाजपा जैसे राष्ट्रीय दलों को अब स्थानीय स्तर पर मजबूत आत्मनिर्भर उम्मीदवारों से टक्कर मिल रही है। यह बदलाव पंचायत स्तर पर राजनीतिक संतुलन को नई दिशा देने का संकेत है।
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