Tuesday, January 18, 2022
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जाने कैसे मजदूर (laborer) ने दूसरे के एकाउंट से निकाल लिए एक करोड़ रूपये

नई दिल्ली, खबर संसार। जी, हां आप ने सही पढ़ा एक मजदूर (laborer) ने बैंक के खाते एक एक करोड़ से ज्यादा रुपये अगर मजदूर निकाले तो क्या आप हैरान रह जाएंगे? लेकिन यह कारनामा दिल्ली के एक बैंक में हुआ है। यहां पर कुछ लोगों की मिली भगत के बाद यह पैसे निकाले गए है।

सबसे हैरानी वाली बात यह है कि इस बैंक से जिस तरीके से पैसा निकाला गया वह क्राइम की दुनिया में हैरान करने वाला था। आइए जानते हैं पूरी कहानी। जर्मनी में रहने वाली प्रवासी भारतीय (एनआरआइ) के ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित आइसीआइसीआइ बैंक खाते से 1.35 करोड़ रुपये निकालने के मामले में मध्य जिला के साइबर सेल ने बैंक की उक्त शाखा के एक कर्मचारी समेत पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

नया नम्बर जारी भी कराया

एनआरआइ के खाते से संबद्ध मोबाइल बंद हो जाने पर बैंक कर्मी ने अपने दाेस्त को उक्त नंबर का सिमकार्ड हासिल करने, खाते में जमा धनराशि का विवरण व उसे निकालने के तौर तरीके के बारे में जानकारी दी थी। जिसके बाद सभी ने साजिश रच वारदात को अंजाम दिया। खाते से सभी रकम निकाल लिए गए। रुपये निकालने के लिए आरोपितों ने फरीदाबाद में वर्कफोर्स इंडिया प्राइवेट नाम से फर्जी कंपनी खोली थी। (laborer)

डीसीपी मध्य जिला स्वेता चौहान के मुताबिक गिरफ्तार किए गए आरोपितों के नाम सुमित पांडे (लालकुआं, गाजियाबाद), शैलेंद्र प्रताप सिंह (शास्त्री नगर), नीलम (सोहना, हरियाणा), जगदंबा प्रसाद पांडे (मऊ, यूपी) व आदर्श जायसवाल उर्फ राहुल (आजमगढ़, यूपी) है। सुमित पांडे राजेंद्र नगर स्थित आइसीआइसीआइ बैंक में कर्मचारी था। घटना के बाद उसे निकाल दिया गया।

जर्मनी में रहने वाली एनआरआइ कनिका गिरधर ने राजेंद्र नगर थाने में बीते नवंबर में धोखाधड़ी के तहत मामला दर्ज कराया था। शिकायत में कहा था कि जब उन्होंने अपने खाते में रकम की जांच करनी चाही तो सही पासवर्ड के अभाव में उन्हें जानकारी नहीं मिल पाई।

बैंक के अधिकारियों से संपर्क करने पर पता चला कि उनकी एफडी से सारे रकम निकाल लिए गए। आनलाइन ट्रांसफर, चेक व एटीएम के माध्यम से 1.35 करोड़ रुपये निकाले गए। उनके खाते के लिए नया चेक बुक व नया एटीएम कार्ड जारी किया गया था।

ऐसे की जालसाजी

चेक बुक व एटीएम कार्ड विशाल नाम के व्यक्ति को दिया गया जिसने अपना परिचय शिकायतकर्ता के भाई के रूप में दिया था। जबकि कनिका ने बैंक से चेक बुक या एटीएम कार्ड जारी करने के लिए कोई अनुरोध नहीं किया था। उनकी कोई भाई-बहन नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी साइबर सेल जांच की जिम्मेदारी सौंपी। (laborer)

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शैलेंद्र प्रताप सिंह ने बड़खल चौक, फरीदाबाद में किराए पर कार्यालय लेकर उसमें वर्कफोर्स इंडिया प्राइवेट नाम से फर्जी कंपनी खेली। उक्त कंपनी में कई मजदूरों के काम करने संबंधी दस्तावेज तैयार किया और अपने दो सहयोगियों जगदंबा प्रसाद पांडे और राहुल को वहां प्रबंधकों के रूप में नियुक्त किया।

दस मजदूरों के नाम पर इक्विटास स्माल फाइनेंस बैंक, एयू स्माल फाइनेंस बैंक, एचडीएफसी बैंक व आइसीआइसीआइ बैंक में खाते खुलवाए। इसके बाद उन्होंने शिकायतकर्ता के खाते का पंजीकृत मोबाइल नंबर एक मजदूर के नाम पर फिर से जारी करवाया और उस सिम पर पीड़ित के खाते की इंटरनेट बैंकिंग सुविधा ले ली। दरअसल कनिका का नंबर तीन महीने से उपयोग में नहीं था इस कारण नंबर निष्क्रिय मोड में चला गया था। (laborer)

आरोपितों ने मजदूरों के नाम से एटीएम कार्ड और चेक बुक एकत्र कर लिए। उसके बाद शिकायतकर्ता कनिका गिरधर के खाते से राशि निकालना शुरू कर दिया और मजदूरों के खातों में पैसे ट्रांसफर कर लिए। धीरे-धीरे पूरी राशि एटीएम के जरिए निकाल ली गई। खाते मेें 63 रुपये छोड़ दिया गया। रकम निकालने के बाद आरोपितों ने किराए का कार्यालय खाली कर दिया और सभी गायब हो गए थे।

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